Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडरों के भारी संकट ने कारोबारियों और हलवाइयों की नींद उड़ा दी है। गैस की आपूर्ति ठप होने और सिलेंडरों की भारी कमी के चलते शादी-ब्याह के सीजन में कैटरिंग का काम प्रभावित हो रहा है। इस संकट से निपटने के लिए राजधानी के हलवाइयों ने अब एक अनोखा और किफायती विकल्प ढूंढ निकाला है। शहर में बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए राजस्थान से विशेष 'डीजल भट्ठियां' मंगवाई गई हैं। गैस पर निर्भरता कम करने के लिए अपनाया गया यह 'राजस्थानी जुगाड़' अब पूरी घाटी में चर्चा का विषय बना हुआ है।
व्यावसायिक सिलेंडरों की किल्लत से थमी रफ्तार
पिछले कुछ दिनों से देहरादून और आसपास के इलाकों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। एजेंसियों के पास बुकिंग की लंबी कतार है, लेकिन मांग के मुकाबले आपूर्ति न के बराबर है। होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों पर काम करना दूभर हो गया है। विशेषकर बड़े आयोजनों में जहां दर्जनों सिलेंडरों की आवश्यकता होती है, वहां काम रुकने की नौबत आ गई थी। गैस वितरकों का कहना है कि पीछे से ही स्टॉक कम आ रहा है, जिससे व्यावसायिक उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देना मुश्किल हो रहा है।
राजस्थान से आई डीजल भट्ठियों का कमाल
गैस संकट का समाधान निकालने के लिए देहरादून के हलवाइयों ने राजस्थान के कारीगरों से संपर्क कर वहां इस्तेमाल होने वाली आधुनिक डीजल भट्ठियां मंगवाई हैं। इन भट्ठियों की खासियत यह है कि ये कम समय में ज्यादा गर्मी पैदा करती हैं और इनमें ईंधन के रूप में डीजल का उपयोग होता है, जो आसानी से उपलब्ध है। हलवाइयों का मानना है कि गैस सिलेंडर के मुकाबले डीजल भट्ठियां अधिक किफायती साबित हो रही हैं। एक बड़ी भट्ठी को चलाने में लगने वाला डीजल खर्च, ब्लैक में मिल रहे महंगे गैस सिलेंडर से काफी कम बैठ रहा है।
लागत कम और काम हुआ आसान
मिठाई विक्रेताओं और कैटरर्स के अनुसार, राजस्थान से मंगवाई गई ये भट्ठियां न केवल मजबूत हैं, बल्कि इनमें आंच को नियंत्रित करना भी आसान है। बड़े कड़ाहों में दूध उबालने, खोया बनाने और पकवान तलने के लिए ये भट्ठियां रामबाण साबित हो रही हैं। हालांकि, परंपरागत रूप से लकड़ी या कोयले का उपयोग भी एक विकल्प था, लेकिन धुआं और प्रदूषण के कारण उसे शहर में इस्तेमाल करना कठिन था। ऐसे में डीजल भट्ठियों ने काम को रफ्तार दी है और शादी समारोहों में भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल रही है।
प्रशासन और आपूर्ति विभाग पर उठ रहे सवाल
शहर में अचानक पैदा हुए इस ईंधन संकट ने आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारियों का कहना है कि सीजन के समय इस तरह की किल्लत होना उनके रोजगार पर सीधा हमला है। फिलहाल, जब तक गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक ये डीजल भट्ठियां ही देहरादून के रसोइयों की 'लाइफलाइन' बनी रहेंगी। जानकारों का कहना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो भविष्य में गैस की कीमतों से बचने के लिए कई और कारोबारी इस तकनीक को अपना सकते हैं।
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