Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री सह उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा हड़ताली अंचल अधिकारियों (CO) और राजस्व कर्मचारियों को दिया गया अल्टीमेटम बेअसर साबित हो रहा है। मंत्री ने सख्त निर्देश दिया था कि 31 मार्च 2026 तक सभी कर्मी काम पर वापस लौटें, अन्यथा बर्खास्तगी जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद, गुरुवार (2 अप्रैल 2026) को प्रदेश के कई अंचलों में सन्नाटा पसरा रहा और अधिकारी अपनी कुर्सी से नदारद मिले।
खैरा अंचल की पड़ताल: 'साहब हड़ताल पर हैं'
डिप्टी सीएम के आदेशों की जमीनी हकीकत जानने के लिए जब जमुई के खैरा अंचल कार्यालय की पड़ताल की गई, तो स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई।
नदारद अधिकारी: अंचल अधिकारी (CO) से लेकर राजस्व कर्मचारी तक अपने कार्यालयों से गायब मिले।
कामकाज ठप: कार्यालय कर्मियों ने बताया कि सीओ हड़ताल पर हैं। हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन जमीन से जुड़े मुख्य कार्य जैसे मोटेशन, परिमार्जन और भूमि विवाद सुलझाने का काम पूरी तरह बंद है। फिलहाल केवल विधि व्यवस्था और आरटीपीएस (RTPS) काउंटर का काम ही चल पा रहा है।
जनता की परेशानी: दर-दर भटक रहे लोग
हड़ताल और अधिकारियों की अनुपस्थिति का सबसे बुरा असर आम जनता पर पड़ रहा है। कार्यालय पहुंचे कई लोगों ने अपना दर्द साझा किया:
श्रीधर तांती (हरणी): भूमि विवाद मामले में भूमि सुधार उपसमाहर्ता (DCLR) का आदेश लागू कराने आए थे, लेकिन सीओ के न होने से फाइल आगे नहीं बढ़ सकी।
राकेश कुमार (गोपालपुर): 'परिमार्जन प्लस' के तहत उनका मामला महीनों से लंबित है। हड़ताल ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
प्रमोद रावत (खैरा): जमीन के प्लॉट सुधार के लिए कई दिनों से अंचल कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारी की कुर्सी खाली मिलने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
क्या था मंत्री का अल्टीमेटम?
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि 31 मार्च तक काम पर नहीं लौटने वाले अधिकारियों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू की जाएगी। विभाग ने 1 अप्रैल से सभी अंचलों में राजस्व अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति के आदेश भी जारी किए थे। लेकिन खैरा जैसे अंचलों की स्थिति बताती है कि सरकारी तंत्र में मंत्री के आदेश का खौफ फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
अब देखना यह होगा कि क्या विभाग अपने वादे के मुताबिक अनुपस्थित अधिकारियों पर 'बर्खास्तगी' की गाज गिराता है या जनता इसी तरह सिस्टम की बेरुखी का शिकार होती रहेगी।




