Prabhat Vaibhav,Digital Desk : रात के अंधेरे में चमकने वाला चंद्रमा आखिर आया कहां से? यह सवाल सदियों से वैज्ञानिकों को मथता रहा है। लेकिन अब 'जायंट इम्पैक्ट हाइपोथीसिस' (विशाल प्रभाव परिकल्पना) ने एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है जो किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लगता है। ताजा शोधों के अनुसार, चंद्रमा का निर्माण पृथ्वी और 'थिया' (Theia) नामक एक प्राचीन ग्रह की भीषण टक्कर से हुआ था। इस टक्कर के बाद पृथ्वी ने उस ग्रह के एक बड़े हिस्से को 'निगल' लिया और बाकी बचे मलबे से हमारा चांद बन गया।
45 लाख साल पहले हुई थी ब्रह्मांडीय महाटक्कर
वैज्ञानिकों का मानना है कि लगभग 45 लाख वर्ष पहले, जब सौर मंडल अपनी किशोरावस्था में था, तब मंगल ग्रह के आकार का एक विशाल ग्रह 'थिया' तेज रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ा। यह कोई मामूली टक्कर नहीं थी। इस जबरदस्त भिड़ंत से इतनी ऊर्जा पैदा हुई कि पृथ्वी की ऊपरी सतह पूरी तरह पिघल गई और अरबों टन चट्टानें व धूल अंतरिक्ष में बिखर गईं।
पृथ्वी के भीतर आज भी दफन है 'थिया' ग्रह का दिल
चौंकाने वाली बात यह है कि थिया ग्रह इस टक्कर के बाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ, बल्कि वह पृथ्वी का हिस्सा बन गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, थिया का भारी लौह कोर (Iron Core) पिघली हुई पृथ्वी के केंद्र में जाकर समा गया। इस विलय ने न केवल पृथ्वी के आकार को बदला, बल्कि हमारे ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) को भी इतनी शक्ति दी कि आज हम यहां जीवन जीने में सक्षम हैं। अफ्रीका और प्रशांत महासागर के नीचे गहरे हिस्से में आज भी थिया के मेंटल के अवशेष मौजूद हैं, जिन्हें वैज्ञानिक "लार्ज लो वेलोसिटी प्रोविंस" कहते हैं।
सटीक कोण ने बचा ली पृथ्वी और बना दिया चंद्रमा
खगोलविदों का अनुमान है कि यह टक्कर लगभग 45 डिग्री के कोण पर हुई थी। यह कोण बहुत महत्वपूर्ण था; अगर टक्कर सीधी होती तो शायद पृथ्वी पूरी तरह नष्ट हो जाती। लेकिन इस सटीक तिरछी टक्कर की वजह से पृथ्वी का काफी मलबा अंतरिक्ष की कक्षा में फैल गया। समय बीतने के साथ गुरुत्वाकर्षण ने इस मलबे और धूल को एक साथ समेटना शुरू किया, जिससे धीरे-धीरे चंद्रमा का स्वरूप तैयार हुआ।
एक जैसा DNA: पृथ्वी और चंद्रमा की चट्टानों में समानता
इस सिद्धांत को सबसे ज्यादा मजबूती तब मिलती है जब हम पृथ्वी और चंद्रमा की चट्टानों का मिलान करते हैं। अपोलो मिशन के दौरान लाए गए पत्थरों की रासायनिक संरचना पृथ्वी की चट्टानों से काफी मिलती-जुलती है। इतना ही नहीं, माना जाता है कि इसी टक्कर की वजह से जीवन के लिए जरूरी तत्व जैसे कार्बन, नाइट्रोजन और सल्फर पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में आए, जिससे आगे चलकर जीवन की शुरुआत हुई।




