Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पूर्व अभिनेत्री और साध्वी ममता कुलकर्णी अपने बेबाक और विवादास्पद बयानों के कारण एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने धर्म, राजनीति और संत समुदाय से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। साध्वी ममता कुलकर्णी ने अविमुक्तेश्वरानंद, महामंडलेश्वर, बॉलीवुड, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए।
ममता कुलकर्णी ने सबसे पहले अविमुक्तेश्वरानंद पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उन्हें शंकराचार्य किसने नियुक्त किया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि लाखों की भीड़ में रथ पर सवार होने की उन्हें क्या ज़रूरत थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के शिष्यों की पिटाई उन्हीं की वजह से हुई थी। उन्होंने कहा कि चाहे राजा हो या गरीब, सभी को कानून का पालन करना चाहिए और किसी को भी अहंकार नहीं करना चाहिए।
उन्होंने महामंडलेश्वर पर भी हमला किया। ममता कुलकर्णी ने कहा कि दस में से नौ महामंडलेश्वर और तथाकथित शंकराचार्य झूठे और ज्ञानहीन हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके गुरु नाथ संप्रदाय से थे और एक तपस्वी संत थे। इस दौरान ममता कुलकर्णी ने वेदों के अपने ज्ञान का भी जिक्र किया। उन्होंने ऋग्वेद में ऋषि कुणाल और श्वेतकेतु के बीच हुए संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म को राजनीति से दूर रखना चाहिए।
राहुल गांधी से ज्यादा सक्षम हैं प्रियंका गांधी-ममता कुलकर्णी
ममता कुलकर्णी ने कहा कि उन्हें फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई विकल्प नजर नहीं आता और भविष्य में भी मोदी ही नेता बने रहेंगे। उन्होंने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को राहुल गांधी से अधिक सक्षम बताया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले साल भाजपा ने बंगाल में अपनी पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन ममता बनर्जी महाकाली की शक्ति के कारण जीत गईं।
क्या अखिलेश यादव गौहत्या रोकने का वादा कर सकते हैं? - ममता कुलकर्णी
इसके अलावा, अखिलेश यादव से सवाल करते हुए ममता कुलकर्णी ने पूछा कि क्या वे गौहत्या रोकने का वादा कर सकते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या अखिलेश यादव गौहत्या के मुद्दे पर कोई ठोस आश्वासन देंगे। ममता कुलकर्णी ने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस जन्म में बॉलीवुड में वापसी नहीं करेंगी और महामंडलेश्वर पद से भी इस्तीफा दे देंगी। अंत में, उन्होंने ममता बनर्जी को सलाह दी कि वे किसी भी मुद्दे पर अतिवादी रुख न अपनाएं।




