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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के गिरते स्तर ने देश की सियासत में उबाल ला दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने रुपये की इस कमजोरी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर सीधा निशाना साधा है। थरूर ने सरकार को पुरानी यादें दिलाते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को अब वह शालीनता दिखानी चाहिए कि वे यूपीए शासन के दौरान की गई अपनी उन तीखी आलोचनाओं को वापस लें, जो उन्होंने रुपये की गिरावट पर की थीं। थरूर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल लगातार गिरती अर्थव्यवस्था और महंगाई को लेकर सरकार को घेर रहे हैं।

थरूर का तंज: पुरानी आलोचनाओं को याद करे भाजपा

शशि थरूर ने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से केंद्र सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार सत्ता में थी, तब मौजूदा सत्ताधारी दल के बड़े नेता रुपये की गिरावट पर प्रधानमंत्री की उम्र और गरिमा से जोड़कर बयानबाजी करते थे। थरूर ने सवाल उठाया कि क्या आज वही मापदंड वर्तमान सरकार पर लागू नहीं होते? उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की मजबूती का दावा करने वाली सरकार आज रुपये को संभलने में नाकाम साबित हो रही है। कांग्रेस नेता ने मांग की कि सरकार को अपनी विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए और उन पुरानी टिप्पणियों के लिए खेद प्रकट करना चाहिए जो केवल राजनीतिक लाभ के लिए की गई थीं।

रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया, विपक्ष ने खोला मोर्चा

भारतीय रुपया पिछले कुछ सत्रों से लगातार दबाव में है और डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। शशि थरूर ने तर्क दिया कि रुपये की इस कमजोरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है, क्योंकि इससे आयात महंगा हो रहा है और देश में महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने वित्त मंत्रालय से जवाब मांगा कि आखिर वे कौन से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं जिनसे रुपये की सेहत में सुधार हो सके। विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल आंकड़ों की बाजीगरी कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है।

आर्थिक नीतियों पर सवाल और सुधार की मांग

थरूर ने अपने हमले में केवल आलोचना ही नहीं की, बल्कि सरकार की आर्थिक नीतियों की दिशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निर्यात में कमी और विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन में खामियों के कारण रुपये की साख गिर रही है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि शालीनता और नैतिकता का तकाजा यही है कि जो लोग विपक्ष में रहकर रुपये की गिरावट को 'राष्ट्रीय शर्म' बताते थे, वे आज सत्ता में बैठकर इसका स्पष्टीकरण दें। इस राजनीतिक बयानबाजी ने संसद से लेकर सड़क तक आर्थिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है, जिससे सरकार रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रही है।