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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची (Voter List) को लेकर होने वाले विवादों और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। आयोग ने राज्य में 'अपीलीय ट्रिब्यूनल' (Appellate Tribunals) का गठन कर दिया है, जिसमें 19 सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति की गई है। बंगाल की राजनीति में अक्सर मतदाता सूची में नाम जोड़ने, काटने या फर्जी मतदाताओं को लेकर लगने वाले आरोपों के बीच आयोग का यह फैसला निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। अब मतदाताओं और राजनीतिक दलों को अपनी शिकायतों के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना होगा।

19 पूर्व जजों की तैनाती, जिलों में बटेगा कार्यभार

निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त किए गए ये 19 पूर्व न्यायाधीश राज्य के विभिन्न हिस्सों में शिकायतों की सुनवाई करेंगे। इन ट्रिब्यूनल्स का मुख्य कार्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Revision) के दौरान आने वाली उन अपीलों का निपटारा करना होगा, जो जिला निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर अनसुलझी रह जाती हैं। आयोग के सूत्रों के अनुसार, इन जजों को उनकी निष्पक्ष छवि और न्यायिक अनुभव के आधार पर चुना गया है। कोलकाता से लेकर सिलीगुड़ी तक, इन ट्रिब्यूनल्स के पास न्यायिक शक्तियां होंगी, जिससे वे मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर तत्काल और अंतिम फैसला सुना सकेंगे।

फर्जी वोटिंग और नाम कटने की शिकायतों पर लगेगी लगाम

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर विपक्षी दलों ने लगातार सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से सीमावर्ती इलाकों में 'डेमोग्राफिक चेंज' और मृत व्यक्तियों के नाम सूची में बने रहने जैसे मुद्दे गरमाए रहते हैं। चुनाव आयोग के इस नए सिस्टम से अब ऐसी हर शिकायत की स्क्रूटनी सीधे जजों की देखरेख में होगी। यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से काटा गया है या किसी बाहरी व्यक्ति का नाम जोड़ा गया है, तो ट्रिब्यूनल साक्ष्यों के आधार पर उसे दुरुस्त करने का आदेश देगा। इससे चुनाव के दौरान होने वाली संभावित हिंसा और तनाव को भी कम करने में मदद मिलेगी।

समय सीमा के भीतर होगा निपटारा, आयोग की पैनी नजर

चुनाव आयोग ने इन अपीलीय ट्रिब्यूनल्स के लिए सख्त समय सीमा (Deadline) भी निर्धारित की है। सभी 19 जजों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्राप्त होने वाली अपीलों पर तय वक्त के भीतर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला दें, ताकि अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन में कोई देरी न हो। आयोग का मानना है कि न्यायिक हस्तक्षेप से चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी और आम जनता का लोकतांत्रिक प्रणाली में भरोसा और मजबूत होगा। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को इन ट्रिब्यूनल्स को आवश्यक बुनियादी ढांचा और स्टाफ मुहैया कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।