Prabhat Vaibhav,Digital Desk : केंद्र सरकार ने नेशनल हाईवे पर टोल प्लाजा की सुविधा को सुचारू बनाने के लिए फास्टैग लागू किया था। योजना यह थी कि वाहन पर लगे फास्टैग को टोल प्लाजा पर लगे स्कैनर द्वारा तुरंत स्कैन किया जाए और वाहन चालक बिना रुकावट के आगे बढ़ सके। लेकिन शंभू टोल प्लाजा पर सर्वर लगातार डाउन होने से यह सुविधा यात्री के लिए परेशानी का सबब बन गई है।
लंबी कतारों से जाम जैसे हालात
टोल प्लाजा पर सर्वर डाउन रहने के कारण एक वाहन को टोल पार करने में 10 से 20 मिनट तक का समय लग जाता है। इससे वाहनों की लंबी कतारें बन जाती हैं और कई बार जाम जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को अन्य राज्यों से जोड़ने वाले इस टोल प्लाजा से गुजरना हजारों यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।
फास्टैग में बैलेंस होने के बावजूद परेशानी
कई यात्रियों के फास्टैग अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस होने के बावजूद सर्वर डाउन होने के कारण टोल कर्मचारी उनके बैलेंस को सही तरीके से नहीं दिखा पाते। इसके चलते टोल कर्मचारियों और यात्रियों के बीच बहसबाजी आम हो गई है।
भौगोलिक संरचना और सुरक्षा घेरेबंदी से जाम बढ़ा
शंभू टोल पर जाम के पीछे सिर्फ सर्वर डाउन होना ही नहीं, बल्कि पुल और सड़क की भौगोलिक स्थिति भी जिम्मेदार है। घग्गर नदी पर बना पुल अपनी क्षमता से अधिक भार उठा रहा है। यह पुल इतना संकरा है कि भारी वाहन अकेले ही इसे पार कर सकते हैं, जिससे पीछे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। सुरक्षा घेरेबंदी भी ट्रैफिक को धीमा कर देती है।
आपातकालीन वाहनों के लिए खतरा
लंबी कतारों और जाम के कारण आपातकालीन वाहन जैसे एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन या पुलिस गाड़ियां भी समय पर नहीं निकल पाती। यह स्थिति यात्रियों और स्थानीय लोगों दोनों के लिए गंभीर समस्या बन गई है।




