Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के पॉश इलाकों में स्थित सरकारी आवासों पर सालों से कब्जा जमाए बैठे रसूखदारों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सरकारी बंगलों के मोह में नियम-कानून ताक पर रखने वालों को कोर्ट ने दो टूक चेतावनी देते हुए प्रशासन को गहरी नींद से जागने की नसीहत दी है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब रसूख के दम पर सरकारी संपत्तियों पर कुंडली मारकर बैठने का दौर खत्म होना चाहिए।
पूर्व सीएम बेअंत सिंह के परिवार को आवास खाली करने का आदेश
सुनवाई के दौरान सेक्टर-35 स्थित एक हाई-प्रोफाइल कोठी का मामला कोर्ट के सामने आया। अदालत को बताया गया कि इस बंगले की अलॉटमेंट अवधि काफी समय पहले ही समाप्त हो चुकी है, फिर भी यह खाली नहीं किया गया है। जानकारी के अनुसार, इस आवास में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह का परिवार रह रहा है। वर्तमान में वहां रह रहे प्रकाश सिंह के बेटे केंद्र सरकार में मंत्री हैं। इस पर हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बेअंत सिंह की हत्या हुए 32 साल बीत चुके हैं, अब परिवार को ऐसा क्या खतरा है कि वे सरकारी आवास नहीं छोड़ रहे? कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि परिवार को आवास खाली करने के लिए कहा जाए।
'प्रशासन अब सोए नहीं, कार्रवाई करे'
हाईकोर्ट ने इस मामले में चंडीगढ़ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकारी मकानों पर अन्य अवैध कब्जों को लेकर अब सोइए मत। अधिकारी दफ्तरों से बाहर निकलें और सुनिश्चित करें कि जिनकी अलॉटमेंट अवधि खत्म हो चुकी है, उनसे मकान खाली कराए जाएं। कोर्ट ने साफ किया कि सरकारी संसाधनों का इस तरह दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रसूखदारों में मचा हड़कंप
हाईकोर्ट के इस सख्त रवैये के बाद चंडीगढ़ के सेक्टर-35, सेक्टर-7 और अन्य वीआईपी इलाकों में रह रहे उन लोगों में हड़कंप मच गया है, जो अलॉटमेंट रद्द होने के बावजूद दशकों से सरकारी कोठियों का आनंद ले रहे हैं। प्रशासन अब कोर्ट के आदेश के बाद ऐसे अवैध कब्जों की सूची तैयार कर रहा है, जिन पर जल्द ही पीला पंजा चल सकता है या उन्हें खाली करने का नोटिस थमाया जा सकता है।
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