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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : खालसा पंथ की जन्मस्थली श्री आनंदपुर साहिब में शौर्य और शक्ति के प्रतीक 'होला महल्ला' उत्सव का पहले दिन बेहद उत्साहपूर्ण आगाज हुआ। सोमवार को गुरु नगरी की सड़कों पर श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि तिल रखने की भी जगह नहीं बची। पंजाब के कोने-कोने और पड़ोसी राज्यों से संगत ट्रैक्टर-ट्रालियों, बसों और निजी वाहनों के जरिए गुरु चरणों में शीश नवाने पहुंच रही है। तख्त श्री केसगढ़ साहिब की ओर जाने वाले हर मार्ग पर सिर्फ और सिर्फ 'बोले सो निहाल' के जयकारे सुनाई दे रहे हैं।

डबल डेकर ट्रैक्टर-ट्रालियां बनीं आकर्षण का केंद्र

होला महल्ला के पहले दिन सबसे खास नजारा गांवों से आने वाली संगत का रहा। श्रद्धालु अपने ट्रैक्टर-ट्रालियों को विशेष रूप से 'डबल डेकर' के रूप में तैयार कर पहुंचे हैं, ताकि एक साथ अधिक से अधिक लोग यात्रा कर सकें। इन ट्रालियों को रंग-बिरंगे कपड़ों, फूलों और धार्मिक निशानों (झंडों) से भव्य रूप से सजाया गया है। रास्ते भर कीर्तन करती और गुरबाणी का सिमरन करती संगत का उत्साह देखते ही बन रहा है। दोपहर होते-होते शहर के मुख्य मार्गों पर संगत की भारी भीड़ जमा हो गई।

गोलगप्पों का 'खास लंगर' और सेवा की अनूठी मिसाल

होला महल्ला के अवसर पर सेवा और सिमरन का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। आनंदपुर साहिब की ओर जाने वाले रास्तों पर जगह-जगह लंगर लगाए गए हैं। इस बार अमृतसर के सतलानी साहिब की ओर से नक्कियां के पास लगाया गया 'गोलगप्पों का लंगर' श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा हलवा, कढ़ी-चावल, चाय और ब्रेड-पकौड़ों की सेवा निरंतर जारी है। सेवादारों का कहना है कि गुरु की संगत की सेवा करना ही उनके लिए सबसे बड़ा पुण्य है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, ड्रोन से रखी जा रही नजर

श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। तख्त श्री केसगढ़ साहिब और आसपास के क्षेत्रों में भारी संख्या में पुलिस बल और स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है। यातायात प्रबंधन के लिए विशेष रूट प्लान लागू किया गया है ताकि जाम की स्थिति न बने। प्रशासन ने अनुमान जताया है कि आने वाले दो-तीन दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और भी बड़ा इजाफा होगा, जिसके लिए अतिरिक्त पार्किंग और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

धार्मिक रंग में रंगी आनंदपुर साहिब की धरती

होला महल्ला के पहले दिन से ही पूरा शहर आध्यात्मिक और वीरता के रंग में रंगा नजर आ रहा है। निहंग सिखों के दल अपनी पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचने शुरू हो गए हैं, जो आने वाले दिनों में घुड़सवारी और गतका (सिख मार्शल आर्ट) के जौहर दिखाएंगे। तख्त साहिब पर नतमस्तक होने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं।