Prabhat Vaibhav,Digital Desk : वेयर हाउस मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा आत्महत्या मामले में घिरे पंजाब के पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर पर कानून का शिकंजा और कस गया है। अमृतसर पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में भुल्लर के खिलाफ सबूत खुर्द-बुर्द करने (मिटाने) की एक और गंभीर धारा जोड़ दी है। थाना रंजीत एवेन्यू की पुलिस ने अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 238 के तहत कार्रवाई शुरू की है, जिससे पूर्व मंत्री की मुश्किलें और बढ़ना तय माना जा रहा है।
क्या है नया आरोप? मोबाइल और सिम हुए 'गायब'
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि मामला दर्ज होने के बाद और अपनी गिरफ्तारी से ठीक पहले लालजीत सिंह भुल्लर ने अपने मोबाइल फोन और उसमें मौजूद सिम कार्ड को नष्ट कर दिया।
सबूतों के साथ छेड़छाड़: आरोप है कि मोबाइल में मौजूद महत्वपूर्ण कॉल रिकॉर्डिंग और डेटा को पुलिस से छिपाने के लिए उसे गायब कर दिया गया।
सीसीटीवी फुटेज का रहस्य: आठ दिनों के पुलिस रिमांड के बावजूद, पुलिस भुल्लर के घर के भीतर और बाहर की सीसीटीवी फुटेज या डीवीआर बरामद नहीं कर सकी। आरोप लग रहे हैं कि सबूतों को योजनाबद्ध तरीके से मिटाया गया है।
मैनेजर गगनदीप रंधावा की आत्महत्या का मामला
यह पूरा विवाद वेयर हाउस के मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा की दर्दनाक मौत से जुड़ा है।
टेंडर का दबाव: आरोप है कि भुल्लर अपने पिता सुखदेव सिंह के नाम पर वेयर हाउस का टेंडर लेना चाहते थे। जब गगनदीप रंधावा ने नियमों का हवाला देते हुए टेंडर देने से इनकार किया, तो विवाद बढ़ गया।
मारपीट और प्रताड़ना: 13 मार्च को भुल्लर ने रंधावा को अपने घर बुलाकर उनके साथ मारपीट की थी और कथित तौर पर इसका वीडियो भी बनाया था।
आत्महत्या: इस प्रताड़ना और अपमान से दुखी होकर गगनदीप सिंह रंधावा ने 21 मार्च को जहरीला पदार्थ निगल लिया था, जिससे उनकी मौत हो गई।
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है। पीड़ित परिवार और विपक्ष का आरोप है कि रिमांड के दौरान पुलिस ने जानबूझकर डीवीआर और मोबाइल फोन बरामद करने में ढिलाई बरती। अब सबूत मिटाने की नई धारा जुड़ने के बाद, पुलिस पर इन तकनीकी सबूतों को खोजने का भारी दबाव है।




