Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारत-पाक सीमा पर पड़ोसी मुल्क की नापाक हरकतों को नाकाम करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पंजाब पुलिस ने कमर कस ली है। इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ही बीएसएफ ने रिकॉर्ड 47 ड्रोन मार गिराए हैं, जिनका इस्तेमाल सरहद पार से हथियार और नशीले पदार्थों की खेप भेजने के लिए किया जा रहा था। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए अमृतसर में एक विशेष 'ड्रोन सुरक्षा कार्यशाला' का आयोजन किया गया, जिसमें सेना, बीएसएफ और पुलिस के आला अधिकारियों ने आधुनिक तकनीक पर चर्चा की।
ड्रोन के जरिए नशा और हथियारों की बड़ी खेप बरामद
आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तानी तस्करों ने इस साल तस्करी के लिए हेक्साकॉप्टर, क्वाडकॉप्टर और हाई-एंड मॉडिफाइड ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। बीएसएफ की सतर्कता के कारण पिछले तीन महीनों में निम्नलिखित बरामदगियां हुई हैं:
हेरोइन: 331.264 किलोग्राम नशीला पदार्थ जब्त।
हथियार: 58 अत्याधुनिक हथियार, कारतूस और मैगजीन बरामद।
ड्रोन की संख्या: जनवरी से अब तक 47 ड्रोन पकड़े गए।
उल्लेखनीय है कि साल 2025 में बीएसएफ ने कुल 288 पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया था, लेकिन इस साल की शुरुआत से ही ड्रोन गतिविधियों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है।
अमृतसर में जुटी सुरक्षा एजेंसियों की 'कोर टीम'
बीएसएफ सेक्टर मुख्यालय अमृतसर में आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल अमित कबथियाल (कोर कमांडर 11 कोर) ने की। कार्यशाला में राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई:
बदलती चुनौतियां: पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव और एडीजी बीएसएफ सतीश एस. खंडारे ने समकालीन युद्ध और सीमा प्रबंधन में ड्रोन की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला।
नई तकनीक: डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और सेवानिवृत्त रक्षा विशेषज्ञों ने ड्रोन की पहचान (Detection) और उनकी फॉरेंसिक जांच की क्षमताओं को बढ़ाने पर विचार साझा किए।
एजेंसियों में तालमेल: पंजाब पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और बीएसएफ के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया गया ताकि तस्करी नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।
'एंटी-ड्रोन सिस्टम' को और सशक्त बनाने की तैयारी
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ड्रोन आधारित निगरानी और तस्करी के बढ़ते खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। आईजी बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर डॉ. अतुल फुलझेले ने कहा कि सीमाओं पर सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए नई एंटी-ड्रोन तकनीकों को तैनात किया जा रहा है। अब केवल ड्रोन गिराना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उनके फॉरेंसिक डेटा के जरिए यह भी पता लगाया जाएगा कि उन्हें कहां से और किसने नियंत्रित किया था।




