Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारत सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) गरीबों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिसके तहत पात्र परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलता है। लेकिन, कई बार ऐसी खबरें आती हैं कि पैनल में शामिल होने के बावजूद कुछ अस्पताल आयुष्मान कार्ड धारकों को भर्ती करने या इलाज देने से मना कर देते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आप चुप न बैठें। सरकार ने इसके लिए सख्त शिकायत निवारण तंत्र बनाया है।
1. ऑनलाइन पोर्टल के जरिए (सबसे प्रभावी तरीका)
यदि अस्पताल सहयोग नहीं कर रहा है, तो आप सीधे आधिकारिक पोर्टल पर अपनी बात रख सकते हैं:
सबसे पहले PM-JAY Grievance Portal (cgms.pmjay.gov.in) पर जाएं।
यहाँ 'Register Your Grievance' विकल्प को चुनें।
योजना का नाम (PM-JAY) सिलेक्ट करें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी व अस्पताल का विवरण भरें।
शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग मामले की जांच करेगा और दोषी पाए जाने पर अस्पताल का पैनल रद्द (De-empanelment) भी किया जा सकता है।
2. टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर (तुरंत सहायता के लिए)
जो लोग ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज नहीं हैं, उनके लिए सरकार ने 24x7 हेल्पलाइन जारी की है:
आप सीधे 14555 या 1800-111-565 पर कॉल कर सकते हैं।
कॉल सेंटर के प्रतिनिधि को अपनी समस्या बताएं और अस्पताल का नाम व पता नोट कराएं।
यहाँ से आपको एक शिकायत संख्या (Grievance Number) मिलेगी, जिसे भविष्य के संदर्भ के लिए संभाल कर रखें।
3. मोबाइल ऐप (उमंग ऐप) का उपयोग
डिजिटल माध्यम पसंद करने वालों के लिए 'UMANG App' एक बेहतरीन विकल्प है:
ऐप डाउनलोड करें और आयुष्मान भारत विभाग खोजें।
'शिकायत निवारण' (Grievance Redressal) सेक्शन में जाकर अपनी शिकायत सबमिट करें।
शिकायत दर्ज करते समय इन 4 चीजों को रखें साथ
अपनी शिकायत को मजबूत बनाने और त्वरित कार्रवाई के लिए आपके पास ये दस्तावेज/साक्ष्य होने चाहिए:
आयुष्मान कार्ड की कॉपी: अपना कार्ड नंबर या ई-कार्ड साथ रखें।
अस्पताल के दस्तावेज: यदि डॉक्टर ने कोई पर्चा (Prescription) या भर्ती करने से मना करने का कोई लिखित नोट दिया हो।
डिजिटल साक्ष्य: यदि संभव हो, तो अस्पताल के स्टाफ के साथ हुई बातचीत का वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड कर लें।
संवाद का विवरण: किस डॉक्टर या कर्मचारी ने मना किया, उनका नाम और समय याद रखें।
विशेष सुझाव:
शिकायत दर्ज करने के बाद यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई समाधान नहीं मिलता है, तो अपनी पुरानी 'शिकायत संख्या' का उपयोग करके दोबारा फॉलो-अप लें। सरकार ऐसी शिकायतों पर बहुत गंभीर है और हाल के दिनों में कई अस्पतालों पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है।




