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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भीषण वैश्विक तनाव और अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी एक बहुत बड़ी खबर आई है। ईरान द्वारा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की कड़ी नाकेबंदी के बावजूद भारतीय टैंकर 'जग वसंत' सुरक्षित रूप से गुजरात के कांडला बंदरगाह पहुंच गया है। इस विशालकाय जहाज में 42,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी (LPG) गैस लदी हुई है। ऐसे समय में जब दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर हाहाकार मचा है, भारत की यह कूटनीतिक और रणनीतिक जीत मानी जा रही है।

मिड-सी ट्रांसफर: बीच समुद्र में ही खाली होगा गैस का खजाना

कांडला पोर्ट ट्रस्ट के अधिकारियों के मुताबिक, आपूर्ति में तेजी लाने के लिए 'मध्य-समुद्र स्थानांतरण' (Mid-Sea Transfer) तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि जहाज को किनारे लगने का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि समुद्र के बीच में ही गैस को एक सिस्टम से दूसरे बंदरगाह सुविधा में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में रसोई गैस की सप्लाई को रिकॉर्ड समय में बहाल किया जा सकेगा।

ईरान की विशेष अनुमति: भारत के लिए खुले हैं रास्ते

युद्ध के 29वें दिन भी जहां दुनिया के अधिकांश देशों के लिए होर्मुज का रास्ता बंद है, वहीं भारत ने अपनी मजबूत विदेश नीति का लोहा मनवाया है। गौरतलब है कि ईरान ने केवल चुनिंदा देशों को ही इस संवेदनशील मार्ग के उपयोग की अनुमति दी है, जिनमें भारत प्रमुख है। 'जग वसंत' से पहले भी एमटी शिवालिक, एमटी नंदा देवी और 'जग लाडली' जैसे भारतीय टैंकर लाखों टन कच्चा तेल और गैस लेकर सुरक्षित भारतीय तटों पर पहुंच चुके हैं।

ट्रंप का बड़ा बयान: 10 दिनों तक ईरान पर नहीं होगा हमला

युद्ध के मोर्चे से भी एक बड़ी अपडेट सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अगले 10 दिनों तक अमेरिकी सेना ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) पर कोई हमला नहीं करेगी। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में थोड़ी स्थिरता की उम्मीद जगी है। हालांकि, इजरायल और ईरान के बीच तनाव अभी भी चरम पर है, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सफल प्रयास कर रहा है।

कांडला बंदरगाह: भारत की लाइफलाइन

कांडला बंदरगाह भारत के सबसे बड़े ऊर्जा आयात केंद्रों में से एक है। 'जग वसंत' की इस खेप के आने से घरेलू एलपीजी आपूर्ति पूरी तरह निर्बाध बनी रहेगी। जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के बावजूद भारत ने जिस तरह से अपनी गैस और तेल की खेप सुरक्षित मंगवाई है, उससे आने वाले दिनों में देश में ईंधन की किल्लत होने की कोई संभावना नहीं है।