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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पिछले कुछ दिनों से जारी ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के तनावपूर्ण माहौल के बीच सोशल मीडिया पर एक सनसनीखेज 'नोटिस' तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि युद्धकालीन आपात स्थिति को देखते हुए सरकार ने देशभर में दोबारा लॉकडाउन लगाने का फैसला किया है। व्हाट्सएप और फेसबुक पर शेयर की जा रही एक पीडीएफ (PDF) फाइल ने आम जनता के बीच भारी दहशत पैदा कर दी है।

लेकिन क्या वाकई देश फिर से बंद होने जा रहा है? आइए जानते हैं इस वायरल दावे की हकीकत।

क्या है वायरल 'युद्धकालीन लॉकडाउन नोटिस'?

सोशल मीडिया पर साझा की जा रही यह फाइल बिल्कुल आधिकारिक सरकारी आदेश जैसी दिखाई देती है। इसमें प्रामाणिकता दर्शाने के लिए 'अशोक चक्र' के साथ भारत सरकार के लोगो का भी इस्तेमाल किया गया है। नोटिस में गंभीर शब्दों का प्रयोग करते हुए लिखा गया है कि "युद्ध की स्थिति को देखते हुए तत्काल प्रभाव से देश में लॉकडाउन लागू किया जाता है।" इसकी बनावट इतनी पेशेवर है कि लोग बिना जांचे-परखे इसे फॉरवर्ड कर रहे हैं।

फाइल खोलते ही खुला 'अप्रैल फूल' का राज

जब इस वायरल पीडीएफ फाइल की गहराई से जांच की गई, तो इसकी असलियत सामने आ गई। दरअसल, यह कोई सरकारी आदेश नहीं, बल्कि अप्रैल फूल (1 अप्रैल) का एक भ्रामक मजाक है।

सच्चाई: जैसे ही कोई यूजर इस फाइल को डाउनलोड कर खोलता है, तो अंदर बड़े अक्षरों में "April Fool Day" लिखा आता है और साथ में एक हंसने वाला इमोजी बना होता है।

लापरवाही: ज्यादातर लोग केवल फाइल का नाम और शुरुआती हिस्सा देखकर ही डर गए और उन्होंने पूरी फाइल खोलकर पढ़ने की जहमत नहीं उठाई।

सरकार का स्पष्टीकरण: अफवाहों पर न दें ध्यान

केंद्र सरकार और सूचना प्रसारण मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध की स्थिति के बावजूद देश में किसी भी तरह के लॉकडाउन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह की भ्रामक खबरों और शरारती तत्वों द्वारा फैलाए जा रहे झूठ पर विश्वास न करें।

विशेषज्ञों की सलाह: 1 अप्रैल को अक्सर इस तरह के 'Prank' (मजाक) सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं। किसी भी सनसनीखेज खबर को आगे भेजने से पहले आधिकारिक समाचार चैनलों या सरकारी वेबसाइट (जैसे PIB Fact Check) पर जाकर उसकी पुष्टि अवश्य करें।

भ्रामक पोस्ट की पहचान कैसे करें?

आधिकारिक स्रोत देखें: क्या यह नोटिस सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है?

भाषा की जांच: अक्सर फर्जी नोटिसों में व्याकरण की गलतियां होती हैं।

तारीख का महत्व: 1 अप्रैल को आने वाले ऐसे संदेशों पर विशेष सावधानी बरतें।

पूरी फाइल पढ़ें: केवल हेडलाइन देखकर घबराएं नहीं, पूरा दस्तावेज पढ़ें।