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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में बारूद का ढेर कभी भी सुलग सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद अब ईरान ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। ट्रंप की 'अपमानजनक' भाषा और धमकियों का जवाब देते हुए ईरान ने अमेरिका को उसके इतिहास के सबसे काले सैन्य अध्याय 'ऑपरेशन ईगल क्लॉ' (Operation Eagle Claw) की याद दिलाई है। दुनिया भर में स्थित ईरानी दूतावासों ने ट्रंप का मजाक उड़ाते हुए उन्हें अपनी 'अक्ल ठिकाने' लाने की नसीहत दी है।

'गाली देना बिगड़े बच्चों का काम': ईरानी दूतावास का तीखा तंज

ट्रंप के 'नरक में जाने' वाले बयान के बाद थाईलैंड और भारत स्थित ईरानी दूतावासों ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने 'X' पर लिखा, "इतिहास खुद को दोहराता है। ऑपरेशन ईगल क्लॉ ईरानी रेगिस्तान में अमेरिकी सेना की एक ऐतिहासिक विफलता थी। गाली-गलौज करना बिगड़े हुए बच्चों का काम है, अमेरिका पाषाण युग में लौटने की तैयारी न करे।" ईरान ने साफ कर दिया है कि वह ट्रंप की धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है।

क्या था 'ऑपरेशन ईगल क्लॉ'? जिससे डरता है अमेरिका

ईरान ने जानबूझकर 24 अप्रैल 1980 की उस घटना का जिक्र किया है, जो अमेरिकी सैन्य इतिहास के लिए एक बड़ा धब्बा मानी जाती है। 1979 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे के बाद 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया गया था। इन्हें छुड़ाने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने 'ऑपरेशन ईगल क्लॉ' को मंजूरी दी थी।

रेगिस्तान में आए भीषण धूल भरे तूफान के कारण अमेरिकी हेलीकॉप्टर आपस में टकरा गए थे, जिसमें 8 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे और मिशन को शर्मिंदगी के साथ रद्द करना पड़ा था। ईरान आज इसी विफलता की याद दिलाकर ट्रंप को चेतावनी दे रहा है कि रेगिस्तान की मिट्टी फिर से अमेरिकी सेना का कब्रगाह बन सकती है।

अपशब्दों पर घर में भी घिरे ट्रंप, विपक्षी सांसद ने बताया 'पागलपन'

ट्रंप की भाषा केवल ईरान को ही नहीं, बल्कि खुद अमेरिका के भीतर भी कई लोगों को रास नहीं आ रही है। न्यूयॉर्क के डेमोक्रेटिक सांसद चक शूमर ने ट्रंप पर कड़ा हमला करते हुए कहा, "जब पूरा देश ईस्टर मना रहा है, तब राष्ट्रपति सोशल मीडिया पर पागलों की तरह चिल्ला रहे हैं। हमारा देश ट्रंप की इस ओछी राजनीति से कहीं बेहतर का हकदार है।"

'बिजली संयंत्र दिवस' और 'पुल दिवस': तबाही की तारीख तय?

डोनाल्ड ट्रंप अपनी धमकी पर कायम हैं। उन्होंने शनिवार को फिर दोहराया कि अगर मंगलवार (7 अप्रैल 2026) तक होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया, तो ईरान में 'विद्युत संयंत्र दिवस' और 'पुल दिवस' मनाया जाएगा। इसका मतलब है कि अमेरिकी मिसाइलें ईरान के पावर ग्रिड और परिवहन व्यवस्था को निशाना बनाएंगी। ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में कहा, "होर्मुज जलमार्ग खोलो, वरना नरक जाने के लिए तैयार रहो।"

अब पूरी दुनिया की नजरें 6 अप्रैल की रात और 7 अप्रैल की सुबह पर टिकी हैं। क्या कूटनीति काम करेगी या मिडिल ईस्ट एक भीषण आग की लपटों में घिर जाएगा?