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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की राजनीति में एक युग के परिवर्तन की आहट ने जेडीयू नेताओं और मंत्रियों को भावुक कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की खबरों के बीच बिहार से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज है। दिल्ली स्थित मुख्यमंत्री आवास पर जुटे बिहार सरकार के मंत्रियों और दिग्गज नेताओं के चेहरों पर अपने नेता के राज्य की सक्रिय राजनीति (मुख्यमंत्री पद) से दूर होने की मायूसी साफ नजर आई।

मंत्री मदन सहनी का छलका दर्द: "बिहार को उनकी कमी खलेगी"

बिहार सरकार के मंत्री और जेडीयू के कद्दावर नेता मदन सहनी इस पूरे घटनाक्रम पर काफी भावुक नजर आए। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "नीतीश कुमार जी की राज्यसभा जाने की पुरानी इच्छा रही होगी, जो अब पूरी हो रही है। एक साथी और कार्यकर्ता के तौर पर हमें खुशी है कि उनकी इच्छा पूर्ण हुई, लेकिन सच यह है कि मन में खुशी से ज्यादा दुख है।"

सहनी ने आगे कहा कि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में बिहार की जनता के दिलों पर जो छाप छोड़ी है, उसकी भरपाई नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि यह 'सर' का व्यक्तिगत फैसला है और हम इसका सम्मान करते हैं, पर बिहार के विकास के लिए उनके विजन की कमी हर कदम पर खलेगी।

संजय झा ने बताया जनसेवा का संकल्प: "पद नहीं, सादगी है पहचान"

वहीं, जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर नीतीश कुमार के सार्वजनिक जीवन की सराहना की। उन्होंने लिखा कि जनसेवा कोई पद नहीं, बल्कि एक सतत संकल्प है। संजय झा के अनुसार, नीतीश कुमार ने सादगी और सुशासन के जरिए राजनीति के केंद्र में 'विकास' को लाकर खड़ा किया है। उन्होंने बुनियादी ढांचे से लेकर वंचित वर्गों के उत्थान तक जो काम किए हैं, वे सामूहिक प्रगति की मिसाल हैं।

बिहार की सियासत में 'नीतीश युग' का नया मोड़

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों और अब इस पर नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की कमान अब नए हाथों में जाने की तैयारी है। जहां एक ओर विपक्ष इसे नीतीश कुमार की राजनीतिक विदाई के रूप में देख रहा है, वहीं जेडीयू इसे उनके राष्ट्रीय राजनीति में बड़े कद और नई भूमिका की शुरुआत मान रही है।