Prabhat Vaibhav,Digital Desk : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के 'घर वापसी' और जनसंख्या नियंत्रण वाले हालिया बयान पर देश में सियासी और सामाजिक पारा गरमा गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इस बयान को लेकर संघ प्रमुख पर सीधा और तीखा हमला बोला है। मदनी ने बुधवार (18 फरवरी 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए खतरा बताया है। इस जुबानी जंग ने एक बार फिर दोनों संगठनों के बीच की गहरी वैचारिक खाई को उजागर कर दिया है।
'आजादी के 70 सालों में जो नहीं हुआ, वो आज खुलेआम हो रहा है'
जमीयत अध्यक्ष ने आरएसएस प्रमुख के बयान को पूरी तरह से सांप्रदायिक करार देते हुए कहा कि उनका संगठन हमेशा से ऐसी विभाजनकारी विचारधाराओं का मुखर विरोधी रहा है। उन्होंने कड़े शब्दों में लिखा कि भारत के 70 साल के आजाद इतिहास में जो बातें कभी जुबान पर नहीं लाई गईं, आज वे सरेआम कही जा रही हैं। यह खुलेआम कहा जा रहा है कि दो करोड़ मुसलमानों की उनके 'मूल धर्म' में वापसी कराई जाएगी। मदनी ने तंज कसते हुए सवाल किया, "क्या सिर्फ इन्हीं लोगों ने अपनी मां का दूध पिया है और देश के बाकी नागरिकों ने नहीं?" उन्होंने साफ कहा कि जो आवाजें देश को नफरत और बर्बादी की खाई में धकेल रही हैं, उन्हें किसी भी सूरत में देशभक्ति नहीं कहा जा सकता।
नफरत और मॉब लिंचिंग पर सरकार की चुप्पी खतरनाक
देश के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताते हुए मौलाना मदनी ने आरोप लगाया कि आज सुनियोजित तरीके से नफरत का बीज बोया जा रहा है और हिंसा का माहौल तैयार किया जा रहा है। गौ रक्षा के नाम पर हो रही हिंसा और मॉब लिंचिंग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बेगुनाह लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है, लेकिन अफसोस की बात है कि सरकार इन बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दों पर मूकदर्शक बनी हुई है। मदनी ने स्पष्ट किया कि भारत में सिर्फ एक खास विचारधारा के लोगों के रहने की बात करना सीधे तौर पर भारतीय संविधान की आत्मा पर प्रहार है। ऐसी मानसिकता देश की एकता और अखंडता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
'कयामत तक कायम रहेगा इस्लाम, मिटाने वाले खुद इतिहास बन गए'
धर्म की आड़ में होने वाली किसी भी तरह की हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए मौलाना ने कहा कि दुनिया का हर मजहब इंसानियत, प्रेम और भाईचारे का ही पैगाम देता है। जो लोग अपने स्वार्थ और नफरत के लिए धर्म को हथियार बनाते हैं, वे कभी सच्चे धार्मिक नहीं हो सकते। इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने खुली चेतावनी दी कि मुसलमान अपने दीन और ईमान के साथ जीते आए हैं और कयामत के दिन तक इसी तरह जीते रहेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि अतीत में जिन लोगों ने भी मुसलमानों का वजूद मिटाने की कोशिश की, वे खुद तबाह हो गए और इतिहास के पन्नों से हमेशा के लिए मिट गए। अपनी बात खत्म करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की सच्ची तरक्की और शांति केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान के साये में ही मुमकिन है और देश के हर नागरिक का यह फर्ज है कि वह इसका सम्मान करे।
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