img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : लद्दाख के प्रमुख सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द होने के बाद देश का सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। वांगचुक की रिहाई का स्वागत करते हुए थरूर ने दो टूक कहा कि लोकतंत्र में अलोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और दमनकारी नीतियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। इस बयान ने दिल्ली से लेकर लद्दाख तक हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि वांगचुक पिछले कई दिनों से लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

लोकतंत्र की मर्यादा पर थरूर का बड़ा प्रहार

शशि थरूर ने सोशल मीडिया के माध्यम से वांगचुक की हिरासत को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। थरूर के अनुसार, जिस तरह से वांगचुक और उनके समर्थकों को दिल्ली की सीमाओं पर रोका गया और हिरासत में लिया गया, वह संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ था। उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि असहमति की आवाज को दबाने के बजाय संवाद का रास्ता चुनना चाहिए। थरूर का यह बयान विपक्षी खेमे की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित करने के आरोप लग रहे हैं।

क्यों हिरासत में लिए गए थे सोनम वांगचुक?

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ लेह से दिल्ली तक 'पदयात्रा' कर रहे थे। उनकी मुख्य मांग लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना और इसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना है। जैसे ही यह यात्रा दिल्ली की सीमा पर पहुंची, पुलिस ने धारा 144 का हवाला देते हुए वांगचुक को हिरासत में ले लिया था। प्रशासन का तर्क था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। हालांकि, भारी जन दबाव और कानूनी हस्तक्षेप के बाद उनकी हिरासत रद्द कर दी गई, जिसे वांगचुक और उनके समर्थकों की बड़ी नैतिक जीत माना जा रहा है।

लद्दाख की मांगों पर फिर छिड़ी बहस

वांगचुक की रिहाई के बाद एक बार फिर लद्दाख के भविष्य को लेकर बहस शुरू हो गई है। पर्यावरण की रक्षा और स्थानीय अधिकारों की मांग कर रहे वांगचुक को देश भर के बुद्धिजीवियों और युवाओं का समर्थन मिल रहा है। शशि थरूर के ताजा बयान ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती दे दी है। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मामला संसद से लेकर सड़क तक गूंज सकता है। फिलहाल, वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, उनका संघर्ष अहिंसक तरीके से जारी रहेगा।