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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड के नैनीताल में एक 12 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ हुए यौन शोषण के चर्चित मामले में आरोपी ठेकेदार उस्मान खान को न्यायिक मोर्चे पर बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उस्मान खान की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब आरोपी के पास देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है।

न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने सुनाया फैसला

शुक्रवार को न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने इस संवेदनशील मामले पर अपना महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया। इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। आरोपी पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि पीड़िता के छह बार बयान हो चुके हैं और उनमें विरोधाभास है। साथ ही घटनास्थल पर लाइट की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

राज्य सरकार की दलील: ट्रायल अंतिम चरण में

जमानत का विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने कहा कि इस मामले का ट्रायल कोर्ट में चल रहा है और कई अहम गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। सरकार ने मांग की कि इस जघन्य अपराध के आरोपी को जमानत न दी जाए, बल्कि ट्रायल को जल्द से जल्द निस्तारित करने के आदेश दिए जाएं। हाई कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए उस्मान खान को राहत देने से इनकार कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला पिछले साल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था, जब ठेकेदार उस्मान खान पर शहर की एक 12 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर नैनीताल की मल्लीताल कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना के बाद पूरे नैनीताल में तनाव फैल गया था, आक्रोशित भीड़ ने बाजार में तोड़फोड़ की थी और हिंदू संगठनों ने विरोध में बाजार बंद का आह्वान किया था।

कानूनी शिकंजे में आरोपी

गिरफ्तारी के बाद से ही उस्मान खान जेल की सलाखों के पीछे है। हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद पीड़िता और उसके परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है। फिलहाल आरोपी जेल में ही रहेगा और निचली अदालत में मामले की सुनवाई जारी रहेगी।