Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब और हरियाणा में संगठित अपराधों की जांच को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है। अब इन मामलों की जांच केवल डीएसपी रैंक का अधिकारी ही नहीं, बल्कि इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी भी कर सकेगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डीएसपी स्तरीय बाध्यता को समाप्त करते हुए अपने पहले के निर्देशों में संशोधन कर दिया है। इस फैसले से दोनों राज्यों की पुलिस व्यवस्था को बड़ी प्रशासनिक राहत मिली है।
21 मई के आदेश में किया गया संशोधन
यह आदेश जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने हरियाणा और पंजाब सरकार की ओर से दाखिल संशोधन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए पारित किया। इससे पहले 21 मई 2025 को हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि संगठित अपराध के सभी मामलों की जांच डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस स्तर के अधिकारी ही करेंगे।
एसटीएफ और एजीटीएफ को लेकर भी बदला रुख
पहले के आदेशों में यह भी कहा गया था कि हरियाणा में हर जिले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और पंजाब में हर जिले में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) की अलग-अलग इकाइयां गठित की जाएंगी। इन इकाइयों की कमान वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जानी थी, ताकि संगठित अपराध और गैंगवार पर सख्त नियंत्रण हो सके।
सरकारों ने रखी व्यावहारिक दिक्कतें
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया कि अधिकांश निर्देशों का पालन किया जा चुका है, लेकिन हर संगठित अपराध की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी से कराना व्यावहारिक नहीं है। राज्य में वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या सीमित है, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 से एक समर्पित STF पहले से कार्यरत है और दिल्ली से सटे तथा संगठित अपराध से अधिक प्रभावित जिलों में इसकी फील्ड यूनिट्स तैनात हैं।
पंजाब सरकार ने भी जताई कमी
पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि राज्य में डीएसपी रैंक के अधिकारियों की भारी कमी है। अप्रैल 2025 में गठित एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) पहले से ही एक वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में राज्य स्तर पर काम कर रही है। हर जिले में अलग-अलग AGTF इकाइयां बनाना मौजूदा संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।
हाईकोर्ट का संतुलित फैसला
दोनों राज्यों की दलीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने निर्देशों में संशोधन किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब संगठित अपराध के मामलों की जांच इंस्पेक्टर रैंक या उससे ऊपर के अधिकारी कर सकेंगे, लेकिन जांच डीएसपी या उससे वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में ही होगी।
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि पंजाब और हरियाणा सरकारें अपने संसाधनों और संबंधित क्षेत्रों में संगठित अपराध की वास्तविक स्थिति को देखते हुए यह तय कर सकती हैं कि किस जिले में STF या AGTF की अलग इकाई आवश्यक है।
हर जिले में एक जैसा ढांचा जरूरी नहीं
हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि हर क्षेत्र में संगठित अपराध की समस्या समान नहीं होती, इसलिए हर जिले में एक जैसा ढांचा बनाना अनिवार्य नहीं है। अदालत ने साफ किया कि केवल इस आधार पर कि जांच इंस्पेक्टर कर रहा है, जांच की गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, बशर्ते वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी बनी रहे।




