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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : देश में ईंधन की कीमतों में हुए ताजा इजाफे के बाद सियासी पारा गरमा गया है। प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल के दामों में हुई बढ़ोतरी को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार के इस फैसले से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा और आने वाले दिनों में महंगाई का एक नया दौर शुरू होने वाला है। कांग्रेस नेतृत्व ने सरकार को 'जनविरोधी' करार देते हुए इन बढ़ी हुई कीमतों को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

महंगाई की चौतरफा मार और कांग्रेस का घेराव

कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में वृद्धि केवल ट्रेलर है, असली फिल्म अभी बाकी है। पार्टी का तर्क है कि इंडस्ट्रियल डीजल महंगा होने से परिवहन लागत (Logistics Cost) बढ़ेगी, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं और खाद्य सामग्री की कीमतों पर पड़ेगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हैं, तब भारत में सरकार मुनाफाखोरी में लगी है। "महंगाई की मार, अबकी बार..." के नारे के साथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

आम आदमी और उद्योगों पर पड़ेगा बुरा असर

आर्थिक विशेषज्ञों और कांग्रेस के आर्थिक सेल का मानना है कि इंडस्ट्रियल डीजल के दाम बढ़ने से विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) की लागत में भारी इजाफा होगा। इससे न केवल उद्योगों के मुनाफे पर असर पड़ेगा, बल्कि अंततः उपभोक्ता को ही ज्यादा कीमत चुकानी होगी। प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल करने वाले मध्यम वर्ग के लिए भी यह किसी झटके से कम नहीं है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि एक तरफ सरकार विकसित भारत की बात करती है और दूसरी तरफ ईंधन की कीमतों में चुपके से बढ़ोतरी कर मध्यम वर्ग की कमर तोड़ रही है।

संसद से सड़क तक आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को केवल बयानों तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी ने आगामी सत्र में इस मुद्दे को संसद में उठाने और देशभर में जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के संकेत दिए हैं। विपक्षी खेमे का कहना है कि सरकार आम जनता को राहत देने के बजाय पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों पर काम कर रही है। अब देखना यह है कि कांग्रेस के इस कड़े रुख और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच सरकार अपने इस फैसले पर क्या सफाई देती है या कीमतों में किसी तरह की कटौती का ऐलान करती है।