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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच छिड़े भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस वैश्विक संकट की आंच भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब तक न पहुंचे, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमान संभाल ली है। मंगलवार को राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिलाया कि सरकार 'मिशन मोड' में काम कर रही है और युद्ध के कारण पैदा होने वाले किसी भी ऊर्जा या खाद्य संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

7 'सुपर' एम्पॉवर्ड ग्रुप का गठन: कोविड की तर्ज पर लिए जाएंगे फैसले

प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में घोषणा की कि सरकार ने ईंधन, उर्वरक और जरूरी वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 7 उच्चाधिकार प्राप्त (Empowered Groups) समूहों का गठन किया है। ये समूह ठीक उसी तरह काम करेंगे जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान बनाई गई कमेटियों ने किया था। इन समूहों का मुख्य काम पेट्रोलियम, नेचुरल गैस, सप्लाई चेन और महंगाई जैसे संवेदनशील मोर्चों पर तत्काल और कड़े फैसले लेना होगा ताकि अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल का असर भारत के बाजारों पर कम से कम हो।

होर्मुज जलडमरूमध्य की टेंशन: तेल आयात के लिए तलाशे जा रहे वैकल्पिक रास्ते

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें नहीं, बल्कि 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) का बंद होना है। भारत अपनी तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों में फंसे लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। होर्मुज में फंसे भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालने के लिए राजनयिक स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं। साथ ही, भारत अब तेल और गैस के लिए पारंपरिक खाड़ी देशों के अलावा अन्य वैश्विक विकल्पों (Alternative Sources) पर भी तेजी से काम कर रहा है।

रणनीतिक तेल भंडार में भारी बढ़ोतरी: 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य

ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए केंद्र सरकार ने भारत के 'रणनीतिक तेल भंडार' (Strategic Petroleum Reserves) की क्षमता को बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार ने इस भंडार को 53 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन करने के कार्य में युद्ध स्तर पर तेजी ला दी है। यह भंडार किसी भी आपात स्थिति में देश की तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए एक 'सुरक्षा कवच' की तरह काम करेगा।

किसानों और राशन पर सरकार की नजर: कालाबाजारी करने वालों की खैर नहीं

आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए प्रधानमंत्री ने किसानों को बड़ी राहत दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उर्वरकों (Fertilizers) का पर्याप्त स्टॉक जमा कर लिया गया है और वैश्विक संकट का कोई भी आर्थिक बोझ किसानों पर नहीं डाला जाएगा। इसके साथ ही, पीएम ने राज्य सरकारों को सख्त हिदायत दी है कि युद्ध की आड़ में खाने-पीने की चीजों की जमाखोरी या कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाए और उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।