Prabhat Vaibhav, Digital Desk : उत्तर बिहार के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शुमार दरभंगा एयरपोर्ट पर बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बार फिर यात्रियों पर भारी पड़ गई। सोमवार को मुंबई से आ रही स्पाइसजेट की एक फ्लाइट को पार्किंग स्पेस न होने के कारण करीब 30 मिनट तक आसमान में चक्कर काटने पड़े। इस दौरान विमान में सवार यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया और वे फ्लाइट के किसी दूसरे शहर डायवर्ट होने की आशंका से परेशान रहे।
रनवे फुल, हवा में इंतज़ार
जानकारी के मुताबिक, स्पाइसजेट की फ्लाइट संख्या SG 115 जब दरभंगा के आसमान में पहुँची, तो एटीसी (Air Traffic Control) ने उसे लैंडिंग की अनुमति नहीं दी। इसका कारण यह था कि एयरपोर्ट के छोटे एप्रन (पार्किंग एरिया) पर पहले से ही दो विमान खड़े थे और तीसरे विमान के लिए जगह नहीं बची थी। मजबूरन पायलट को आधे घंटे तक विमान को हवा में ही होल्ड करना पड़ा।
अकासा एयर के उड़ान भरते ही मिली लैंडिंग
पार्किंग का यह संकट तब दूर हुआ जब दरभंगा से दिल्ली जाने वाली अकासा एयर की फ्लाइट ने रनवे से उड़ान भरी। जैसे ही पार्किंग एरिया खाली हुआ, स्पाइसजेट के विमान को लैंडिंग की अनुमति दी गई। इसके बाद ही विमान में सवार यात्रियों ने राहत की सांस ली। बता दें कि यह फ्लाइट अपने निर्धारित समय से भी एक घंटे से अधिक की देरी से दरभंगा पहुँची थी।
उड़ानों की संख्या बढ़ी, लेकिन ढांचा अभी भी छोटा
सोमवार को दरभंगा एयरपोर्ट से कुल 18 विमानों का सफल संचालन हुआ। हालांकि बढ़ती डिमांड के बीच यहाँ सुविधाओं का अभाव साफ़ दिख रहा है:
पार्किंग की कमी: वर्तमान में यहाँ एक साथ दो से अधिक बड़े विमानों को पार्क करने की सुविधा नहीं है, जिससे व्यस्त समय में ऐसी स्थिति बनती है।
देरी और डायवर्जन का डर: यात्रियों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अक्सर उड़ानें प्रभावित होती हैं, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।
प्रबंधन पर उठ रहे सवाल
दरभंगा एयरपोर्ट ने बहुत कम समय में बड़ी कामयाबी हासिल की है, लेकिन पार्किंग बे और टर्मिनल विस्तार में हो रही देरी अब बड़ी समस्या बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही एप्रन का विस्तार नहीं किया गया, तो भविष्य में फ्लाइट डायवर्जन की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर यहाँ के विमानन संचालन पर पड़ेगा।




