Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के सिवान जिले के सिसवन प्रखंड में प्रशासन ने पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी और बिचौलियों के सिंडिकेट को तोड़ने के लिए एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब प्रखंड के किसी भी पेट्रोल पंप पर जरकिन (डिब्बों) में तेल लेने के लिए कड़े नियमों का पालन करना होगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जरकिन में पेट्रोल या डीजल केवल उन्हीं लोगों को दिया जाएगा, जिनकी पहचान 'वास्तविक किसान' के रूप में सुनिश्चित हो सकेगी।
बिचौलियों के दुरुपयोग पर लगाम: क्यों लिया गया यह फैसला?
प्रशासन को लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि सिसवन प्रखंड में कई बिचौलिए किसानों के नाम का सहारा लेकर भारी मात्रा में जरकिनों में तेल भरवा रहे हैं। बाद में इस तेल का ऊंचे दामों पर अवैध व्यापार या अन्य संदिग्ध कार्यों में दुरुपयोग किया जा रहा था। इस 'तेल खेल' को खत्म करने के लिए अधिकारियों ने कमर कस ली है। अब पंप संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे तेल देने से पहले किसान की प्रामाणिकता की जांच करें।
पंप संचालकों को सख्त चेतावनी: नियम तोड़ा तो खैर नहीं
अधिकारियों ने पेट्रोल पंप मालिकों को स्पष्ट चेतावनी जारी की है। यदि कोई पंप संचालक बिना पहचान सुनिश्चित किए या बिचौलियों को जरकिन में तेल देते हुए पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने कहा है कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित पेट्रोल पंप का लाइसेंस रद्द करने तक की नौबत आ सकती है।
वास्तविक किसानों को मिलेगी राहत
प्रशासन के इस कदम का मुख्य उद्देश्य खेती-किसानी के कार्यों (जैसे ट्रैक्टर और सिंचाई पंपसेट) के लिए वास्तविक किसानों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
पहचान अनिवार्य: किसानों को अपनी पहचान (जैसे किसान पंजीकरण या आधार कार्ड) की पुष्टि करनी होगी।
आवश्यकतानुसार आपूर्ति: किसानों को उनकी वास्तविक जरूरत के हिसाब से ही तेल उपलब्ध कराया जाएगा।
जांच अभियान: क्षेत्र में समय-समय पर औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया जाएगा ताकि बिचौलियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
अवैध कारोबारियों में हड़कंप
प्रशासन की इस सख्ती के बाद अवैध तरीके से तेल का भंडारण और बिक्री करने वाले बिचौलियों में हड़कंप मच गया है। वहीं, स्थानीय किसानों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, क्योंकि इससे खाद और बीज की तरह अब तेल के लिए भी उन्हें कालाबाजारी का सामना नहीं करना पड़ेगा।




