Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड में ऊर्जा क्षेत्र से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। राज्य की महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं में शुमार रामगंगा परियोजना के अचानक बंद होने से प्रदेश के बिजली उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस तकनीकी व्यवधान के कारण राज्य का कुल विद्युत उत्पादन अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिसने ऊर्जा निगम (UPCL) की रातों की नींद उड़ा दी है।
उत्पादन ठप होने से चरमराई व्यवस्था
रामगंगा परियोजना से होने वाली बिजली आपूर्ति रुकने का सीधा असर राज्य के ग्रिड पर दिखाई दे रहा है। आंकड़ों की मानें तो उत्पादन में आई इस अचानक कमी की वजह से मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर काफी बढ़ गया है। वर्तमान में यूपीसीएल को इस कमी को पूरा करने के लिए बाहरी स्रोतों और ओपन मार्केट से महंगी बिजली खरीदने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है, जिससे निगम पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी बन रहा है।
निचले स्तर पर पहुंचा राज्य का बिजली ग्राफ
विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों के जलस्तर में बदलाव और तकनीकी कारणों से परियोजनाओं का बंद होना राज्य के लिए दोहरा झटका है। रामगंगा के बंद होने से न केवल स्थानीय स्तर पर कटौती का खतरा मंडरा रहा है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में भी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। विभाग अब युद्धस्तर पर वैकल्पिक व्यवस्थाओं को टटोलने में जुटा है ताकि आम जनता को इस संकट की तपिश न झेलनी पड़े।
यूपीसीएल पर बढ़ा भारी दबाव
बिजली की किल्लत को देखते हुए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के अधिकारियों पर दबाव काफी बढ़ गया है। राज्य की बिजली मांग को पूरा करने के लिए अब केंद्रीय कोटे और अन्य राज्यों से बिजली की मांग की जा रही है। यदि जल्द ही रामगंगा परियोजना दोबारा शुरू नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में घोषित या अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल विभाग स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।
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