Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब विधानसभा के बजट सत्र का सोमवार का दिन सियासी घमासान के नाम रहा। सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के बीच जबरदस्त बहस देखने को मिली। बेअदबी के संवेदनशील मामलों और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को लेकर शुरू हुई यह चर्चा देखते ही देखते व्यक्तिगत छींटाकशी और तीखे वार-पलटवार में बदल गई।
बेअदबी के दोषियों को सजा कब? बाजवा का सीधा सवाल
सदन में मोर्चा संभालते हुए प्रताप सिंह बाजवा ने 'आम आदमी पार्टी' सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार को सत्ता में आए चार साल बीत चुके हैं, लेकिन बेअदबी के मामलों में इंसाफ अब भी अधूरा है। बाजवा ने आरोप लगाया, "सरकार ने वादा किया था कि दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा, लेकिन 6 महीने में रिपोर्ट देने की बात अब ठंडे बस्ते में है। आखिर पंजाब की जनता को जवाब कौन देगा?"
ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) पर घेराबंदी: "हिमाचल ने कर दिखाया, पंजाब कब करेगा?"
पेंशन के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए बाजवा ने कहा कि तीन साल पहले OPS लागू करने की घोषणा केवल कागजों तक सीमित रह गई है। उन्होंने कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां यह योजना लागू हो चुकी है, लेकिन पंजाब के कर्मचारी आज भी हक के लिए तरस रहे हैं।
सीएम मान का पलटवार: "बजट पर बोल रहे हैं या अभिभाषण पर?"
बाजवा के आरोपों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खड़े होकर तंज कसा। उन्होंने पूछा कि क्या विपक्ष के नेता बजट पर चर्चा कर रहे हैं या राज्यपाल के अभिभाषण पर? सीएम के इस सवाल से माहौल और तनावपूर्ण हो गया। बाजवा ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "अगर विपक्ष को बोलने नहीं देना है, तो हमें सदन से बाहर ही निकाल दें।"
इस पर सीएम मान ने चुटकी लेते हुए कहा, "विपक्ष के नेता बार-बार बाहर जाने की बात कर रहे हैं। क्या पहले जब वे सदन से बाहर जाते थे, तो हमसे पूछकर जाते थे?"
कानून-व्यवस्था पर भी उठे सवाल
बहस के दौरान बाजवा ने राज्य की सुरक्षा स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जो सरकार अपने सरपंचों की सुरक्षा नहीं कर सकती, वह आम जनता को सुरक्षा की गारंटी कैसे दे सकती है। सदन में शोर-शराबे के बीच स्पीकर ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराने की कोशिश की, लेकिन काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट बनी रही।




