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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब विधानसभा के बजट सत्र का छठा दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा द्वारा सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाने और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में उनके खिलाफ विशेषाधिकार उल्लंघन (Privilege Motion) का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। इस दौरान सत्तापक्ष (AAP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिससे सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।

वित्त मंत्री चीमा ने पेश किया प्रस्ताव: क्या हैं आरोप?

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए सुखपाल खैहरा के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए। उनके प्रमुख आरोप निम्नलिखित थे:

अभद्र भाषा: खैहरा ने सदन के भीतर जिस भाषा का प्रयोग किया, वह संसदीय परंपराओं के विरुद्ध है।

विवादास्पद इशारे: चीमा ने आरोप लगाया कि सदन से बाहर जाते समय खैहरा ने आपत्तिजनक इशारे किए, जिससे सदन की गरिमा धूमिल हुई।

सोशल मीडिया गतिविधियां: वित्त मंत्री ने यह भी दावा किया कि खैहरा अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए संदिग्ध गतिविधियां चलाते हैं और उससे आर्थिक लाभ कमाते हैं।

प्रस्ताव पर चर्चा के बाद विधानसभा ने इसे मंजूरी दे दी और मामले को विशेषाधिकार समिति के पास जांच के लिए भेज दिया गया है।

"कांग्रेस के खून में..." — डॉ. सुखी के बयान पर बवाल

हंगामा तब और बढ़ गया जब 'आप' विधायक डॉ. सुखविंदर सिंह सुखी ने चर्चा के दौरान एक विवादित टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा कि "चुने हुए प्रतिनिधियों के खिलाफ बोलना कांग्रेस के खून में है।"

कांग्रेस का कड़ा विरोध: इस बयान पर कांग्रेस विधायक भड़क गए और सदन के बीचों-बीच आकर नारेबाजी शुरू कर दी।

कार्रवाई से हटाने की मांग: कांग्रेस विधायकों ने मांग की कि "कांग्रेस" और "खून" जैसे शब्दों को सदन की कार्यवाही (Record) से तुरंत हटाया जाए।

प्रताप सिंह बाजवा का पलटवार: "सीएम पर नियम लागू क्यों नहीं?"

विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार को दोहरे मापदंड अपनाने के लिए घेरा। उन्होंने स्पीकर के सामने तर्क दिया:

सीएम के खिलाफ प्रस्ताव: बाजवा ने कहा कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ भी विशेषाधिकार प्रस्ताव दिया था क्योंकि उन्होंने महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था।

विपक्ष का सवाल: बाजवा ने पूछा कि जब एक विधायक (खैहरा) के खिलाफ प्रस्ताव तुरंत स्वीकार हो सकता है, तो मुख्यमंत्री के मामले में उसे खारिज क्यों किया गया? उन्होंने मांग की कि नियम सबके लिए समान होने चाहिए।