Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट के विस्तार में जिस एक नाम ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वह है रुद्रप्रयाग के लोकप्रिय विधायक भरत सिंह चौधरी का। फर्श से अर्श तक का सफर तय करने वाले भरत चौधरी ने आज राजभवन में मंत्री पद की शपथ लेकर यह साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण का कोई विकल्प नहीं होता। कभी गांव की छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाने वाले एक ग्राम प्रधान रहे भरत चौधरी अब सूबे की नीति निर्धारण वाली सबसे बड़ी मेज पर बैठेंगे। उनके मंत्री बनने की खबर मिलते ही केदारघाटी से लेकर देहरादून तक जश्न का माहौल है।
पंचायती राज से शुरू हुई सियासी पारी और संघर्ष की गाथा
भरत सिंह चौधरी का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर पर ग्राम प्रधान के रूप में की थी। ग्रामीण राजनीति की बारीकियों को समझने और जनता के सीधे संपर्क में रहने का ही परिणाम था कि वे धीरे-धीरे संगठन की सीढ़ियां चढ़ते गए। रुद्रप्रयाग जिले की भौगोलिक परिस्थितियों और वहां की जनसमस्याओं पर उनकी जबरदस्त पकड़ ने उन्हें भाजपा आलाकमान की नजरों में एक भरोसेमंद चेहरा बना दिया। उनके समर्थकों का कहना है कि भरत चौधरी ने कभी भी अपने सरल स्वभाव को नहीं छोड़ा, यही वजह है कि आज एक प्रधान से कैबिनेट मंत्री बनने तक का उनका सफर हर कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा बन गया है।
रुद्रप्रयाग को मिला बड़ा प्रतिनिधित्व और विकास की नई उम्मीद
कैबिनेट में भरत सिंह चौधरी को जगह मिलना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसे रुद्रप्रयाग जिले के लिए एक बड़ी सौगात के रूप में देखा जा रहा है। केदारनाथ धाम के प्रवेश द्वार के रूप में मशहूर इस जिले की कई लंबित योजनाओं को अब पंख लगने की उम्मीद है। जानकार मानते हैं कि भरत चौधरी के पास पर्यटन, कृषि और ग्रामीण विकास का गहरा अनुभव है, जिसका लाभ अब पूरे प्रदेश को मिलेगा। धामी सरकार ने उन्हें कैबिनेट में शामिल कर गढ़वाल मंडल के एक बड़े हिस्से को साधने की कोशिश की है। शपथ ग्रहण के दौरान भरत चौधरी के चेहरे पर वह चमक साफ दिख रही थी, जो सालों के जमीनी संघर्ष के बाद हासिल होती है।
संगठन में पैठ और धामी के भरोसेमंद बनने का सफर
भरत सिंह चौधरी केवल एक विधायक ही नहीं, बल्कि भाजपा संगठन के भीतर एक सुलझे हुए रणनीतिकार भी माने जाते हैं। विधानसभा के भीतर तार्किक बहस हो या फिर आपदा के समय जनता के बीच मौजूदगी, उन्होंने हर मोर्चे पर खुद को साबित किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 'युवा उत्तराखंड-विकसित उत्तराखंड' के विजन में भरत चौधरी एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकते हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि उनकी बेदाग छवि और काम करने की लगन ने ही उन्हें मंत्रिमंडल की इस रेस में सबसे आगे रखा। अब उनके कंधों पर न केवल रुद्रप्रयाग, बल्कि पूरे उत्तराखंड के विकास की बड़ी जिम्मेदारी है।
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