Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की समाधि स्थल पर आयोजित श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह के दूसरे दिन का कार्यक्रम आध्यात्मिक गरिमा और भव्यता के साथ शुरू हुआ। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा और संत सम्मेलन में देशभर से आए संत-महात्माओं, धर्माचार्यों और विद्वानों ने सनातन परंपरा, राष्ट्र निर्माण और आध्यात्मिक मूल्यों पर विचार साझा किए।
द्वितीय दिवस के कार्यक्रम में वक्ताओं ने गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज के जीवन-दर्शन, सनातन धर्म की समन्वयकारी परंपरा और समाज को दिशा देने में अध्यात्म की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
राम मंदिर के बाद अन्य धार्मिक स्थलों का भी समाधान होगा: आलोक कुमार
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि संतों के आशीर्वाद और समाज के पुरुषार्थ से राम जन्मभूमि का सपना साकार हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ से जुड़े मामले भी न्यायालय के माध्यम से सुलझेंगे। उन्होंने इसे “हिंदू चेतना और जागरण का शताब्दी काल” बताया।
भारत की भूमि को देवत्व प्राप्त: डॉ. कृष्ण गोपाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारत की धरती को पूरे विश्व में देवत्व प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यहां की नदियां, सरोवर और मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों का प्रतीक हैं। भूमि पूजन और प्रकृति के प्रति सम्मान हमारी सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।
संतों के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहा देश: मनोज सिन्हा
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि संतों के मार्गदर्शन से देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। सनातन संस्कृति में भेदभाव नहीं, बल्कि एकता और समाज कल्याण की भावना है। उन्होंने युवाओं और महिलाओं को इस संस्कृति से जोड़ने पर विशेष जोर दिया और कहा कि भारत आज विश्व की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में शामिल हो चुका है।
दिग्गज संत और नेता रहे मौजूद
कार्यक्रम में जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, योग गुरु स्वामी रामदेव, प्रमोद कृष्णन सहित अनेक संत, धर्मगुरु और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।




