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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : लोकसभा की कार्यवाही के दौरान आज उस समय गहमागहमी बढ़ गई जब एक विवादित गाने ‘सरके चुनर’ का मुद्दा सदन के पटल पर उठा। विपक्षी और सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने इस गाने के बोल और इसके फिल्मांकन पर आपत्ति जताते हुए समाज पर इसके नकारात्मक प्रभाव का हवाला दिया। इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि इस मामले में पहले ही कड़ा संज्ञान लिया जा चुका है। मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि संबंधित विवादित गीत पर आधिकारिक तौर पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है और इसे सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

लोकसभा में सदस्यों ने जताई कड़ी आपत्ति

सदन की कार्यवाही के दौरान शून्यकाल में एक माननीय सदस्य ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि मनोरंजन के नाम पर इस तरह के अश्लील और विवादित गानों का प्रचलन बढ़ रहा है, जो हमारी सांस्कृतिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने 'सरके चुनर' गाने का उदाहरण देते हुए मांग की कि सेंसर बोर्ड और सरकार को ऐसे कंटेंट पर लगाम कसनी चाहिए। इस दौरान सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने भी मेजें थपथपाकर इस मांग का समर्थन किया। सदस्यों का कहना था कि डिजिटल युग में ऐसे गाने बच्चों और युवाओं तक आसानी से पहुंच रहे हैं, जो चिंता का विषय है।

सरकार का स्पष्टीकरण: 'प्रतिबंध के आदेश जारी'

सदन में उठे सवालों का उत्तर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि सरकार अश्लीलता और विवादित सामग्री को लेकर पूरी तरह सजग है। उन्होंने बताया कि इस विशेष गीत के खिलाफ कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिसके बाद विशेषज्ञों की समिति ने इसकी समीक्षा की। समीक्षा में पाया गया कि गाने की सामग्री और बोल सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त नहीं हैं। मंत्री ने सदन को सूचित किया कि संबंधित प्रोडक्शन हाउस और म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप्स को नोटिस जारी कर दिया गया है और इस गाने के प्रसारण पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी तेज करेगी सरकार

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि ओटीटी (OTT) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए 'कंटेंट नियमों' के तहत सरकार अब और भी कड़ाई से निगरानी कर रही है। भविष्य में इस तरह के किसी भी विवादित या समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले गानों या वीडियो पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सदस्यों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में भी लोगों को जागरूक करें ताकि ऐसी सामग्री को रिपोर्ट किया जा सके। सरकार ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर सांस्कृतिक मूल्यों से समझौता नहीं किया जाएगा।