Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच ईरान ने अमेरिका के खिलाफ अपना सबसे आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की सैन्य रणनीति और उसके बयानों पर तंज कसते हुए उसकी तुलना 'वियतनाम युद्ध' के दौर से कर दी है। अराघची ने वाशिंगटन को चेतावनी देते हुए कहा कि आज के हालात वैसे ही हैं जैसे दशकों पहले वियतनाम में थे, जहाँ अमेरिका अपनी हार को जीत बताने की कोशिश कर रहा था। ईरानी विदेश मंत्री द्वारा 'फाइव ओ क्लॉक फॉलीज' (Five O’Clock Follies) का जिक्र किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई बहस छिड़ गई है।
क्या है 'फाइव ओ क्लॉक फॉलीज' जिसका अराघची ने किया जिक्र?
अब्बास अराघची ने अपने बयान में जिस 'फाइव ओ क्लॉक फॉलीज' का उल्लेख किया, वह वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना द्वारा की जाने वाली दैनिक प्रेस ब्रीफिंग का एक व्यंग्यात्मक नाम था। उस समय सायगॉन में हर रोज शाम 5 बजे अमेरिकी अधिकारी पत्रकारों को युद्ध की प्रगति की जानकारी देते थे, जिसे पत्रकार 'झूठ का पुलिंदा' मानते थे। अराघची का इशारा साफ है कि आज भी अमेरिका पश्चिम एशिया के संघर्ष और ईरान के प्रभाव को लेकर जो दावे कर रहा है, वे पूरी तरह से हकीकत से परे और भ्रामक हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास खुद को दोहरा रहा है और अमेरिका एक बार फिर अपनी गलतियों को छिपाने के लिए प्रचार का सहारा ले रहा है।
अमेरिका की सैन्य ताकत को ईरान की सीधी चुनौती
ईरानी विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका की धमकियां अब पुरानी पड़ चुकी हैं। अराघची ने वियतनाम युद्ध की याद दिलाते हुए अमेरिका को यह संदेश देने की कोशिश की है कि केवल आधुनिक हथियारों और तकनीक के दम पर किसी देश के जज्बे को नहीं कुचला जा सकता। उन्होंने कहा कि जिस तरह वियतनाम में अमेरिका को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी, वही स्थिति आज पश्चिम एशिया में बन रही है। ईरान के इस बयान को उसकी बढ़ती सैन्य तैयारियों और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मजबूत होते गठबंधन के रूप में देखा जा रहा है।
कूटनीतिक गलियारों में हलचल, क्या महायुद्ध की है आहट?
अब्बास अराघची का यह तीखा हमला ऐसे समय में आया है जब लाल सागर और लेबनान सीमा पर तनाव चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि 'वियतनाम' का उदाहरण देकर ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। तेहरान ने विश्व शक्तियों को आगाह किया है कि अगर अमेरिका ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो पश्चिम एशिया एक ऐसे दलदल में फंस जाएगा जिससे निकलना नामुमकिन होगा। अराघची के इस बयान के बाद व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, जिससे भविष्य की दिशा तय होगी।
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