Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया (West Asia) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब केवल अरब मुल्कों तक सीमित नहीं रह गया है। खाड़ी के देशों में गरजते लड़ाकू विमानों और मिसाइलों की गूँज ने सात समंदर पार यूरोप की नींद उड़ा दी है। जैसे-जैसे लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूद की गंध फैल रही है, यूरोपीय देशों में घबराहट और बढ़ती जा रही है। कूटनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा इस युद्ध के 'मॉस्को कनेक्शन' (Moscow Connection) को लेकर हो रही है। जानकारों का मानना है कि इस आग की लपटें यूक्रेन युद्ध के मैदान तक पहुँच सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया एक नए वैश्विक संकट की दहलीज पर खड़ी हो गई है।
पुतिन की 'दोहरी चाल' से सहमा यूरोप
यूरोपीय संघ (EU) के देशों को सबसे बड़ा डर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीतिक चालों से लग रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि अगर अमेरिका पूरी तरह से ईरान के साथ युद्ध में उलझ जाता है, तो वाशिंगटन का ध्यान और सैन्य संसाधन यूक्रेन से हटकर पश्चिम एशिया की ओर मुड़ जाएंगे। यह मॉस्को के लिए एक 'गोल्डन चांस' साबित हो सकता है। रूस इस स्थिति का फायदा उठाकर पूर्वी यूरोप में अपनी आक्रामकता बढ़ा सकता है। यूरोप को डर है कि अमेरिका की गैरमौजूदगी में रूस नाटो (NATO) की सीमाओं पर दबाव बढ़ा देगा, जिससे पोलैंड और बाल्टिक देशों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
ऊर्जा संकट और महंगाई का 'डबल अटैक'
यूरोप की घबराहट के पीछे केवल सैन्य कारण नहीं, बल्कि आर्थिक तबाही का डर भी है। ईरान और अमेरिका के बीच पूर्ण युद्ध का मतलब है 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' का बंद होना, जहाँ से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है। रूस पहले ही यूरोप की गैस सप्लाई पर लगाम कस चुका है। ऐसे में अगर अरब का तेल भी रुक जाता है, तो यूरोप में ऊर्जा की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों में पहले से ही मंदी की आहट है, ऐसे में तेल के दामों में उछाल उनके लिए किसी 'डेथ वारंट' से कम नहीं होगा। रूस इस ऊर्जा अस्थिरता का इस्तेमाल यूरोप को ब्लैकमेल करने के लिए कर सकता है।
ईरान को रूसी हथियारों का बैकअप!
एक और महत्वपूर्ण 'मॉस्को कनेक्शन' जो यूरोप को डरा रहा है, वह है रूस और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य साठगांठ। रिपोर्टों के मुताबिक, रूस अपने उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल तकनीक ईरान को मुहैया करा सकता है। बदले में ईरान अपने घातक ड्रोन्स के जरिए यूक्रेन में रूस की मदद कर रहा है। यदि यह गठबंधन और मजबूत होता है, तो यूरोप के दरवाजे पर एक नया 'वॉर फ्रंट' खुल जाएगा। ब्रसेल्स में बैठे रणनीतिकार मान रहे हैं कि ईरान-अमेरिका जंग असल में रूस के लिए एक 'प्रॉक्सी' जीत साबित हो सकती है, जो पश्चिमी देशों के वर्चस्व को हिलाकर रख देगी।
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