Prabhat Vaibhav,Digital Desk : गोरखपुर एम्स ने एक 55 वर्षीय महिला का सफल इलाज कर मायस्थेनिया ग्रेविस (Myasthenia Gravis) जैसी गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी से राहत दिलाई। प्लाज्मा थेरेपी (Therapeutic Plasma Exchange) के जरिए महिला अब सामान्य जीवन की ओर लौट रही है। खास बात यह है कि आयुष्मान भारत योजना की लाभार्थी होने के कारण महिला को उपचार के लिए एक रुपये भी खर्च नहीं करने पड़े।
मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में परेशानी
देवरिया की रहने वाली महिला के मांसपेशियों में धीरे-धीरे कमजोरी आ रही थी और सांस लेने में भी कठिनाई हो रही थी। इसके साथ ही निगलने और बोलने में भी दिक्कतें हो रही थीं। चिकित्सकों ने बताया कि यह स्थिति रेस्पिरेटरी फेल्योर (Respiratory Failure) तक जा सकती थी।
एम्स गोरखपुर में तत्काल भर्ती और प्लाज्मा थेरेपी
महिला को एम्स के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय मिश्र की देखरेख में भर्ती किया गया। उपचार में न्यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. आशुतोष तिवारी, मेडिसिन के जूनियर रेजिडेंट डॉ. सामर्थ और ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन टीम के डॉ. सौरभ मूर्ति और टेक्निकल सुपरवाइजर रविंद्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नर्सिंग स्टाफ प्रियंका, सत्यवीर और अन्य सहयोगियों ने भी पूरी मदद की।
प्लाज्मा थेरेपी कैसे काम करती है
मायस्थेनिया ग्रेविस में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से उन प्रोटीन पर हमला करती है जो मांसपेशियों को सिकोड़ने के लिए जरूरी हैं। इस हमले से न्यूरोमस्कुलर जंक्शन ठीक से काम नहीं करता और मांसपेशियों को संदेश नहीं मिल पाते। प्लाज्मा थेरेपी में रक्त से ये अंटीबॉडीज हटाए जाते हैं, जिससे मांसपेशियों की कमजोरी दूर होती है।
रोग की गंभीरता और जोखिम
यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 40 साल से कम उम्र की महिलाओं और 60 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में अधिक पाया जाता है। मायस्थेनिक संकट (Myasthenic Crisis) एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें सांस लेने में कठिनाई, निगलने और बोलने में परेशानी और पूरे शरीर की मांसपेशियों की कमजोरी होती है। ऐसे रोगियों को तुरंत वेंटिलेशन और प्लाज्माफेरेसिस या इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी की जरूरत होती है।
महिला को मिली नई जिंदगी
एम्स गोरखपुर में प्लाज्मा थेरेपी के सात दिन बाद महिला को स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई। डॉ. अजय मिश्र ने बताया कि इस तरह की योजनाएं ग्रामीण और मध्यवर्गीय मरीजों के लिए बेहद लाभकारी हैं और आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त उपचार सुनिश्चित करती हैं।




