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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में एक लंबे इंतजार और भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बाद आखिरकार लोकतांत्रिक सरकार की बहाली हो गई है। मंगलवार को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कद्दावर नेता तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन ने उन्हें आधिकारिक तौर पर देश की कमान सौंपी। इसके साथ ही बांग्लादेश में अवामी लीग के पतन के बाद शुरू हुआ अंतरिम शासन का दौर भी समाप्त हो गया है।

संसद परिसर के साउथ प्लाजा में हुआ भव्य समारोह

'ढाका ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, नए सांसदों और प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह संसद परिसर के साउथ प्लाजा में आयोजित किया गया। सुबह करीब 10:42 बजे मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई। चूंकि इस समय संसद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त था, इसलिए संवैधानिक प्रावधानों के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त ने ही इस जिम्मेदारी को पूरा किया। समारोह के दौरान ढाका की सड़कों पर बीएनपी समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा और जश्न का माहौल देखने को मिला।

मोहम्मद यूनुस ने भावुक संदेश के साथ दिया इस्तीफा

इससे पहले सोमवार को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता का हस्तांतरण नवनिर्वाचित सरकार को कर दिया। इस्तीफा देते समय यूनुस ने देश के नाम संदेश में कहा कि अंतरिम सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी कर चुकी है, लेकिन लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आजादी और मौलिक अधिकारों की रक्षा की जो लौ जली है, वह बुझनी नहीं चाहिए।

शफीकुर रहमान संभालेंगे विपक्ष की कमान, नाहिद इस्लाम बने सचेतक

बांग्लादेश की 13वीं संसद में इस बार विपक्ष का स्वरूप भी काफी बदला हुआ नजर आएगा। 'देश रूपान्तर' की रिपोर्ट के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान को आधिकारिक तौर पर विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) चुना गया है। वहीं, छात्र आंदोलन से उभरे और नेशनल सिटीजन्स पार्टी (NCP) के संयोजक नाहित इस्लाम को विपक्ष का मुख्य सचेतक (Chief Whip) नियुक्त किया गया है। यह पहली बार है जब संसद में दक्षिणपंथी और युवा नेताओं का ऐसा तालमेल विपक्ष में देखने को मिलेगा।

बीएनपी की प्रचंड जीत और अवामी लीग की गैरमौजूदगी

हाल ही में संपन्न हुए इन चुनावों में बीएनपी ने एकतरफा प्रदर्शन किया है। कुल 297 सीटों में से 209 सीटों पर कब्जा जमाकर तारिक रहमान ने अपनी ताकत का एहसास कराया। दूसरी ओर, दक्षिणपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतकर खुद को देश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया है। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी 'अवामी लीग' को इन चुनावों में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया था, जिसके चलते मुकाबला बीएनपी और निर्दलीयों के बीच ही सिमट कर रह गया था।

हिंसा और अनिश्चितता के बाद नए अध्याय की शुरुआत

साल 2024 में शेख हसीना के देश छोड़कर जाने के बाद बांग्लादेश ने जो हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता देखी थी, तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना उस पर पूर्ण विराम के रूप में देखा जा रहा है। अब रहमान के सामने देश की चरमराई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी। वैश्विक मंच पर भी भारत सहित अन्य देशों की निगाहें रहमान की नई विदेश नीति पर टिकी हुई हैं।