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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने सूबे की एनडीए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'समृद्धि यात्रा' और एनडीए के विकास के दावों पर पलटवार करते हुए तेजस्वी ने तीखे सवाल पूछे हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए पूछा कि अगर बिहार में पिछले दो दशकों से 'डबल इंजन' की सरकार है, तो आज भी राज्य विकास के हर सूचकांक (Index) में देश में सबसे नीचे क्यों खड़ा है?

"गरीबी और पलायन का केंद्र बना बिहार"

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि एनडीए के लंबे शासनकाल के बावजूद बिहार देश का सबसे गरीब राज्य बना हुआ है।

पलायन की मार: उन्होंने कहा कि रोजगार के अभाव में बिहार के युवाओं को दूसरे राज्यों में दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। राज्य से होने वाला पलायन आज भी सबसे बड़ी समस्या है।

बेरोजगारी का दंश: तेजस्वी ने बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) और स्कूल ड्रॉपआउट रेट को लेकर सरकार की नीतियों को पूरी तरह विफल करार दिया।

शिक्षा और साक्षरता दर पर उठाए गंभीर सवाल

शिक्षा व्यवस्था की जर्जर स्थिति पर चिंता जताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बिहार की साक्षरता दर आज भी देश में सबसे कम है।

सुविधाओं का अभाव: तेजस्वी के अनुसार, राज्य के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर और आईसीटी (ICT) लैब जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: उन्होंने सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर कब तक बिहार के छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए तरसते रहेंगे? स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली भी किसी से छिपी नहीं है।

आर्थिक सूचकांकों में सबसे पीछे होने का लगाया आरोप

आर्थिक मोर्चे पर सरकार को विफल बताते हुए तेजस्वी ने कहा कि प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) के मामले में बिहार राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे है।

औद्योगिक सन्नाटा: राज्य में नए उद्योगों की संख्या नगण्य है, जिससे निवेश और रोजगार के अवसर सीमित हो गए हैं।

किसानों की बदहाली: तेजस्वी ने सवाल उठाया कि जब किसानों की आय नहीं बढ़ रही और प्रति व्यक्ति उपभोग कम है, तो सरकार किस 'समृद्धि' का दावा कर रही है?

महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी

आम आदमी की जेब पर पड़ रही मार का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने कहा कि बिहार के लोग देश की सबसे महंगी बिजली, गैस और पेट्रोल-डीजल खरीदने को मजबूर हैं।

बुनियादी ढांचा: उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के बड़े-बड़े विज्ञापनों के पीछे बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी छिपी हुई है।

जवाबदेही की मांग: तेजस्वी ने सरकार से मांग की कि वे इन तथ्यों पर अपनी चुप्पी तोड़ें और जनता को बताएं कि आखिर 21 साल के शासन के बाद भी बिहार पिछड़ा क्यों है?