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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में गहराते तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजरें ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'खर्ग द्वीप' (Kharg Island) पर टिकी हुई हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई की चर्चाओं ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खर्ग द्वीप पर कोई भी हमला होता है, तो इसके परिणाम केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को ईंधन की भारी किल्लत और आसमान छूती कीमतों का सामना करना पड़ सकता है। इसे ईरान की आर्थिक रीढ़ या 'लाइफलाइन' कहा जाता है, जिसके ठप होने का मतलब है वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा।

खर्ग द्वीप: ईरान की अर्थव्यवस्था का 'पावर हाउस'

खर्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा सा भूभाग जरूर है, लेकिन ईरान के कच्चे तेल के निर्यात में इसकी भूमिका 90 प्रतिशत से भी अधिक है। ईरान का लगभग पूरा कच्चा तेल इसी टर्मिनल के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। विशालकाय टैंकरों के लंगर डालने के लिए यहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। यही कारण है कि सामरिक दृष्टिकोण से यह द्वीप ईरान के लिए सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण संपत्ति है। अगर इस पर हमला होता है, तो ईरान की आय का सबसे बड़ा स्रोत पल भर में खत्म हो सकता है, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।

यूएस और इजरायल के निशाने पर क्यों है यह द्वीप?

पिछले कुछ हफ्तों में जिस तरह से तेहरान और वॉशिंगटन के बीच जुबानी जंग तेज हुई है, उसने इस द्वीप की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियों का मानना है कि खर्ग द्वीप को निशाना बनाकर ईरान पर अधिकतम दबाव बनाया जा सकता है। हालांकि, सैन्य जानकारों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से 'हार्ममुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है। यदि ऐसा हुआ, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में $20 से $30 प्रति बैरल तक का उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत समेत तमाम विकासशील देशों की जेब पर पड़ेगा।

भयावह होंगे हमले के परिणाम, मंदी की आशंका

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का कहना है कि खर्ग द्वीप पर हमला 'पेंडोरा बॉक्स' खोलने जैसा होगा। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। यदि तेल निर्यात का यह मुख्य केंद्र ध्वस्त होता है, तो खाड़ी देशों में एक भीषण युद्ध छिड़ सकता है। दुनिया भर की सप्लाई चेन बाधित होने से न केवल तेल, बल्कि परिवहन और मैन्युफैक्चरिंग लागत भी बढ़ जाएगी, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया सांसें रोककर इस तनावपूर्ण स्थिति के शांत होने का इंतजार कर रही है।