Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पूर्वी एशिया में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए एक के बाद एक करीब 10 मिसाइलें दागकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। यह मिसाइल परीक्षण ऐसे समय में किया गया है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाएं संयुक्त युद्धाभ्यास कर रही हैं। उत्तर कोरिया की इस उकसावे वाली कार्रवाई के बाद जापान में हड़कंप मच गया और वहां की सरकार ने तत्काल अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। किम जोंग उन की इस नई हिमाकत ने प्रशांत क्षेत्र में युद्ध की आहट को और तेज कर दिया है।
अमेरिका-दक्षिण कोरियाई युद्धाभ्यास से बौखलाया प्योंगयांग
उत्तर कोरिया की इस आक्रामक कार्रवाई के पीछे अमेरिका और दक्षिण कोरिया का वर्तमान सैन्य अभ्यास माना जा रहा है। प्योंगयांग हमेशा से इन अभ्यासों को अपने ऊपर हमले की तैयारी और उकसावे के रूप में देखता रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ इतनी संख्या में मिसाइलें दागकर किम जोंग उन ने यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। दक्षिण कोरियाई सेना ने भी इस असामान्य मिसाइल लॉन्च की पुष्टि की है और अपनी निगरानी व्यवस्था को 'हाई अलर्ट' पर रखा है।
जापान में अफरा-तफरी और सुरक्षा परिषद की नजर
उत्तर कोरियाई मिसाइलों के जापानी जलक्षेत्र के करीब गिरने की आशंका को देखते हुए टोक्यो में आपातकालीन बैठक बुलाई गई। जापानी प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस कार्रवाई को 'अस्वीकार्य' बताते हुए कड़ी निंदा की है। कई इलाकों में चेतावनी के सायरन बजने लगे और ट्रेन सेवाओं को कुछ समय के लिए रोक दिया गया। जापान सरकार का कहना है कि वे स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और अमेरिका के साथ समन्वय कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं, क्योंकि उत्तर कोरिया पर कई तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध पहले से ही लागू हैं।
मिसाइल परीक्षण से बढ़ी परमाणु युद्ध की आशंका
जिस तरह से उत्तर कोरिया ने एक साथ 10 मिसाइलें दागी हैं, उसने विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या किम जोंग उन किसी बड़े हमले की तैयारी में हैं। इन मिसाइलों की मारक क्षमता और उनकी सटीक दूरी का आकलन किया जा रहा है। प्योंगयांग की इस कार्रवाई को उसकी 'न्यूक्लियर वॉर' की तैयारियों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। क्षेत्र में बढ़ते इस तनाव ने वैश्विक शेयर बाजारों से लेकर कूटनीतिक गलियारों तक चिंता की लहर पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस नई चुनौती का जवाब किस प्रकार देते हैं।
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