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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मध्य पूर्व में जारी ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच तनाव अब कूटनीतिक चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्ध में जीत और ईरान के साथ गुप्त बातचीत के दावों को तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान में तैनात ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघदम ने इस्लामाबाद से कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की वार्ता की गुंजाइश खत्म हो चुकी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन के शांति वार्ता के दावे महज एक 'ढोंग' और 'धोखा' हैं।

ईरान का पलटवार: 'अमेरिका का वैश्विक प्रभाव अब खत्म'

अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने हालिया अमेरिकी राजनयिक प्रयासों को 'रणनीतिक हार' करार दिया है। खमत अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता ने सरकारी मीडिया के माध्यम से कहा कि अमेरिका अब अपनी हार को 'समझौते' का नाम देकर दुनिया को गुमराह कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का कभी गौरवशाली रहा प्रभाव अब ढलान पर है और उसकी रणनीतिक शक्ति अब विफलता में तब्दील हो गई है। राजदूत मोघदम ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने वार्ता के दौरान विश्वासघात किया, जिसके कारण ही यह युद्ध शुरू हुआ।

ट्रंप के दावों पर छिड़ा विवाद: 'होर्मुज का उपहार' क्या है?

दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया था कि ईरान अब परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है और उसने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका को एक 'महत्वपूर्ण उपहार' भेजा है। ईरान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें अमेरिकी चुनाव और वैश्विक छवि सुधारने का हथकंडा बताया है। ईरान का कहना है कि वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर बैठने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

इजरायल की दो टूक: 'ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले रहेंगे जारी'

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने किसी भी शांति वार्ता की जानकारी से इनकार किया है। उन्होंने साफ कहा कि इजरायल का एकमात्र लक्ष्य ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना है। डैनन ने चेतावनी दी कि इजरायली और अमेरिकी सेना ईरान में सैन्य ठिकानों, बैलिस्टिक मिसाइल यूनिटों और परमाणु क्षमताओं को निशाना बनाना जारी रखेगी। इजरायल का दावा है कि उनके हमलों ने ईरानी सरकार को काफी कमजोर कर दिया है और वे इस क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए सैन्य कार्रवाई को जरूरी मानते हैं।

मध्य पूर्व में अशांति का कौन है जिम्मेदार?

ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे देखें कि इस क्षेत्र में अशांति कौन फैला रहा है। ईरान के अनुसार, अमेरिका और इजरायल की जोड़ी ने पश्चिम एशिया के देशों की संप्रभुता का उल्लंघन किया है। दूसरी ओर, इजरायल का कहना है कि ईरान का आतंकवाद को समर्थन और परमाणु महत्वाकांक्षाएं ही इस पूरे युद्ध की जड़ हैं। फिलहाल, पाकिस्तान की जमीन से दिया गया ईरान का यह बयान दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के समीकरणों को और अधिक पेचीदा बना सकता है।