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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में सड़क यात्रा अब पहले से ज्यादा महंगी हो गई है। वार्षिक संशोधन के तहत 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के सभी प्रमुख एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर टोल की नई दरें प्रभावी हो गई हैं। एनएचएआई (NHAI) और यूपीडा (UPEIDA) ने टोल दरों में औसतन 5 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही अब टोल प्लाजा पर नकद (Cash) भुगतान की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।

प्रमुख एक्सप्रेसवे पर क्या बदली दरें?

नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही आगरा-लखनऊ, दिल्ली-मेरठ और पूर्वांचल जैसे व्यस्त मार्गों पर यात्रा का खर्च बढ़ गया है:

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे: कार और जीप के लिए एकतरफा टोल ₹170 से बढ़ाकर ₹175 कर दिया गया है।

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे: यहाँ भी श्रेणियों के आधार पर टोल में ₹5 से लेकर ₹50 तक की वृद्धि की गई है।

पूर्वांचल और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे: इन रूटों पर भी नई दरें 31 मार्च की आधी रात से लागू हो गई हैं।

टोल वृद्धि का गणित: किस वाहन पर कितना असर?

विभिन्न श्रेणियों के वाहनों के लिए टोल में हुई बढ़ोतरी का अनुमानित विवरण नीचे दिया गया है:

वाहन श्रेणीटोल में अनुमानित बढ़ोतरी
कार / जीप / हल्के वाहन₹5 से ₹10 तक
बस / ट्रक (भारी वाहन)₹25 से ₹50 तक
विशाल कमर्शियल वाहन₹50 से ₹100 तक

कैश पेमेंट बंद: FASTag और UPI ही एकमात्र विकल्प

1 अप्रैल से उत्तर प्रदेश के सभी टोल प्लाजा पर एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब नकद भुगतान (Cash Payment) पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

अनिवार्य डिजिटल भुगतान: अब केवल FASTag या UPI के माध्यम से ही टोल चुकाया जा सकेगा।

दोगुना जुर्माना: यदि आपके वाहन पर वैध FASTag नहीं है या बैलेंस कम है, तो आपको दोगुना टोल देना पड़ सकता है।

अपील: यूपीडा और एनएचएआई ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपना FASTag बैलेंस जरूर चेक कर लें ताकि प्लाजा पर अनावश्यक देरी न हो।

आम आदमी और ट्रांसपोर्टरों पर असर

टोल की इन नई दरों से न केवल निजी कार मालिकों बल्कि ट्रांसपोर्टरों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। दिल्ली-लखनऊ और दिल्ली-मेरठ जैसे रूटों पर दैनिक आवाजाही करने वालों के लिए यह मासिक बजट को प्रभावित करने वाला फैसला है। माल ढुलाई महंगी होने से आने वाले दिनों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी इसका असर दिख सकता है।