Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में जारी तनाव अब अपने सबसे चरम बिंदु पर पहुंच गया है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सोमवार (20 अप्रैल) से शुरू होने जा रही दूसरे दौर की शांति वार्ता से ठीक पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'करो या मरो' की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने उनके द्वारा प्रस्तावित 'निष्पक्ष समझौते' पर हस्ताक्षर नहीं किए, तो अमेरिका उसके तमाम बिजली संयंत्रों और पुलों को मलबे के ढेर में तब्दील कर देगा।
ट्रुथ सोशल पर बरसे ट्रंप: "ईरान ने तोड़ा युद्धविराम का भरोसा"
ट्रंप के इस कड़े रुख के पीछे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हुई ताजी गोलीबारी को मुख्य कारण माना जा रहा है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "ट्रुथ सोशल" पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने ब्रिटिश और फ्रांसीसी जहाजों पर हमला कर युद्धविराम का उल्लंघन किया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अब नरमी दिखाने का वक्त खत्म हो चुका है और ईरान की "हत्या की मशीन" को हमेशा के लिए बंद करने का समय आ गया है।
ईरान की आर्थिक कमर टूटी: "नाकाबंदी से हो रहा हर दिन करोड़ों का नुकसान"
ट्रंप ने ईरान की उस धमकी का भी मजाक उड़ाया जिसमें उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की बात कही थी। ट्रंप ने कहा, "ईरान क्या मार्ग बंद करेगा, हमारी नाकाबंदी ने उसे पहले ही ठप कर दिया है। इस मार्ग के बंद होने से ईरान को प्रतिदिन 5 करोड़ डॉलर (करीब 420 करोड़ रुपये) का भारी नुकसान हो रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि अब दुनिया भर के जहाज ईंधन के लिए अमेरिका के टेक्सास और अलास्का का रुख कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा हो रहा है।
इस्लामाबाद में 'आर-पार' की बैठक: 47 साल का हिसाब चुकता करने की तैयारी
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान पर किए गए हमलों के बाद से ही स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ 14 दिनों का युद्धविराम अब खत्म होने की कगार पर है। ट्रंप ने कहा है कि वह वह काम करने जा रहे हैं जो पिछले 47 वर्षों में कोई अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं कर पाया।
सोमवार शाम को इस्लामाबाद में शुरू होने वाली इस वार्ता में ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल होंगे। पूरी दुनिया की सांसें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि यह तय करेगी कि खाड़ी देशों में शांति लौटेगी या फिर ट्रंप की धमकी के बाद ईरान विनाश के नए दौर में प्रवेश करेगा।




