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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने मध्य पूर्व में सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का बड़ा निर्णय लिया है। दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford को इस क्षेत्र की ओर रवाना किया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय समीकरण और अधिक संवेदनशील हो गए हैं।

मध्य पूर्व में बढ़ेगी अमेरिकी ताकत

जानकारी के मुताबिक, USS Abraham Lincoln पहले से ही अपने गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक जहाजों के साथ तैनात है। अब फोर्ड के पहुंचने के बाद दो बड़े कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और कई युद्धपोत क्षेत्र में सक्रिय रहेंगे। इससे अमेरिका की सैन्य शक्ति में उल्लेखनीय इजाफा होगा और ईरान पर रणनीतिक दबाव और बढ़ेगा।

तैनाती की बदली दिशा

फोर्ड को पहले यूरोप भेजने की योजना थी, लेकिन बाद में उसे कैरेबियन सागर की ओर मोड़ दिया गया, जहां वह वेनेजुएला के खिलाफ अभियान का हिस्सा बना। इस दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolás Maduro की गिरफ्तारी की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचाई। अब अचानक इसे मध्य पूर्व भेजने का फैसला किया गया है। जहाज के चालक दल को बताया गया है कि उनकी तैनाती अप्रैल या मई तक जारी रह सकती है, जिससे कुल अवधि 8 से 10 महीने तक हो सकती है।

ट्रंप के सख्त संकेत

हाल ही में ट्रंप ने संकेत दिया था कि ईरान के साथ बातचीत संभव है, लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि नया परमाणु समझौता नहीं हुआ तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। इस बीच उनकी इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से लंबी बातचीत भी हुई। बताया जाता है कि इस चर्चा में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और हमास व हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को समर्थन रोकने के मुद्दे शामिल थे।

क्षेत्र में युद्ध का खतरा

हाल ही में ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई थी, लेकिन खाड़ी देशों ने चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष भड़क सकता है। गाजा में चल रहे युद्ध के प्रभाव से मध्य पूर्व अभी उबर नहीं पाया है। इजरायल और हमास के बीच संघर्ष ने पहले ही हजारों लोगों की जान ले ली है, जिससे हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं।