Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में संस्कृत शिक्षा के पुनरुद्धार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद को गठन के 25 साल बाद आखिरकार अपना स्थायी और आधुनिक भवन मिलने जा रहा है। राजधानी लखनऊ के निशातगंज में लगभग 41-42 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य 'हाईटेक मॉडर्न कैंपस' तैयार किया जाएगा। यह भवन न केवल प्रशासनिक कार्यों का केंद्र होगा, बल्कि संस्कृत भाषा के शोध और नवाचार का नया वैश्विक हब भी बनेगा।
2001 से था स्थायी भवन का इंतज़ार
उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद का गठन 17 फरवरी 2001 को हुआ था। तब से लेकर अब तक परिषद किराए या अन्य सरकारी भवनों के भरोसे चल रही थी। वर्ष 2002 में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से कक्षा 8 (प्रथमा) से कक्षा 12 (उत्तर मध्यमा) तक की परीक्षाओं और प्रमाणपत्रों की जिम्मेदारी परिषद को सौंपी गई थी। लंबे समय से एक स्वतंत्र परिसर की मांग की जा रही थी, जो अब साकार होने जा रही है।
निशातगंज में 2 एकड़ में फैलेगा 'नागर शैली' का परिसर
पहले इस भवन को सिटी स्टेशन के पास बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन मेट्रो लाइन की बाधा के कारण अब इसे राजकीय इंटर कॉलेज, निशातगंज के पीछे की करीब दो एकड़ जमीन पर शिफ्ट कर दिया गया है।
स्थापत्य कला: भवन का निर्माण पारंपरिक नागर शैली में किया जाएगा, जो भारतीय संस्कृति की झलक पेश करेगा।
आधुनिक सुविधाएं: परिसर में एक अत्याधुनिक लैंग्वेज लैब (Language Lab), विशाल लाइब्रेरी, मीटिंग हॉल और शोध केंद्र बनाया जाएगा।
लैंग्वेज लैब से खुलेगा शोध का नया द्वार
इस नए कैंपस की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 'लैंग्वेज लैब' होगी। यहाँ न केवल संस्कृत, बल्कि अन्य भारतीय और विदेशी भाषाओं पर भी तुलनात्मक शोध की सुविधा मिलेगी। इससे छात्रों और शिक्षकों को भाषा विज्ञान के आधुनिक पहलुओं को समझने में मदद मिलेगी।
संस्कृत शिक्षा को मिलेगा नया आयाम
नए भवन के निर्माण से प्रदेश में संस्कृत परीक्षाओं के संचालन, परिणामों की घोषणा और प्रशासनिक समन्वय में काफी तेजी आएगी। पिछले वित्तीय वर्ष में बजट लैप्स होने के बाद, अब नए वित्तीय वर्ष में परियोजना को दोबारा मंजूरी दे दी गई है। जल्द ही कार्यदायी संस्था का चयन कर निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा।




