Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड में परिवहन व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। अब गढ़वाल और कुमाऊं संभाग के कई जिलों में पुराने मैनुअल फिटनेस सेंटर बंद कर दिए गए हैं, जिससे वहां के कॉमर्शियल यात्री वाहनों को फिटनेस (वाहन जांच) कराने के लिए दूर स्थित शहरों तक लंबा सफर करना पड़ेगा।
क्या बदला है नियम?
पहले जिलों जैसे टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी और कोटद्वार में वाहन चालकों को स्थानीय मैनुअल फिटनेस सेंटर पर अपने बस, टैक्सी या मैक्सी का फिटनेस टेस्ट कराने की सुविधा थी। अब ऐसी केंद्रों को बंद कर दिया गया है और वाहनों को फिटनेस के लिए डेहरादून या हरिद्वार के ATS (Automatic Testing Station) केंद्रों तक आना होगा।
इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा को बेहतर बनाना बताया गया है। तकनीकी जांच और औज़ारों के साथ किए जाने वाला परीक्षण अब मैनुअल की बजाय ऑटोमेटेड मशीनों पर ही कराना अनिवार्य है, ताकि फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने में गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके।
क्यों यह बदलाव लागू किया गया?
मैनुअल फिटनेस सेंटर बंद: जिलों में पुराने सेंटर को रोक दिया गया है क्योंकि वहां सिर्फ मानवीय परीक्षा होती थी। अब तक नई तकनीक वाली मशीनें हर जगह स्थापित नहीं हुई हैं।
स्थानीय ATS सेंटर तैयारी: कई जिलों में ATS सेंटर का ढांचा तैयार किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल उन्हें पूरी तरह चालू नहीं किया गया है। इसलिए देहरादून और हरिद्वार तक जाना आवश्यक है।
किसे लाभ और चुनौती मिलेगी?
लाभ: तकनीकी रूप से सटीक फिटनेस जांच होने से सड़क सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौती: वाहन चालकों और परिवहन ऑपरेटरों को अब देहरादून या हरिद्वार तक जाना होगा, जिससे समय, इंधन और खर्च बढ़ सकते हैं।
राज्य में करीब 4,17,094 कॉमर्शियल यात्री वाहन (बसेस, टैक्सी, मैक्सी आदि) हैं और इनमें से ढाई लाख वाहन सिर्फ गढ़वाल संभाग में चलते हैं। इन्हें अब देहरादून या हरिद्वार ATS सेंटर जाकर ही फिटनेस टेस्ट कराना होगा।
क्या आगे बदलाव आएंगे?
अभी कई जिलों में ऑटोमेटेड फिटनेस मशीनों का निर्माण और परीक्षण जारी है। जैसे ही यह काम पूरा होगा, स्थानीय स्तर पर भी फिटनेस टेस्ट की सुविधा उपलब्ध होने की संभावना है।




