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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने अपने कार्यकाल के चार साल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इन चार वर्षों में 'देवभूमि' ने न केवल अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत किया है, बल्कि विकास के मोर्चे पर भी राष्ट्रीय पटल पर लंबी छलांग लगाई है। 'विकास और विरासत' का जो अनूठा मॉडल धामी सरकार ने पेश किया है, उसकी धमक आज पूरे देश में सुनाई दे रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर निवेश और पर्यटन से लेकर शिक्षा तक, राज्य ने हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

रफ्तार पकड़ता उत्तराखंड: ढाई घंटे में दिल्ली और पहाड़ों तक रेल का सपना सच

धामी सरकार के पिछले चार साल कनेक्टिविटी के लिहाज से 'स्वर्ण युग' साबित हुए हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का काम अब अपने अंतिम चरणों की ओर है, जो पहाड़ की लाइफलाइन बदलने वाला है। वहीं, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड के पूरा होते ही देश की राजधानी से देहरादून का सफर महज ढाई घंटे का रह जाएगा। नैनीताल की बहुप्रतीक्षित जमरानी बांध परियोजना और टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू होना राज्य की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। इसके अलावा 'उड़ान योजना' के जरिए अब उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक हेलीकॉप्टर सेवा पहुंच चुकी है, जिससे आपातकालीन और पर्यटन सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

निवेश का नया हब: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में मारी बाजी

उत्तराखंड अब केवल पर्यटन ही नहीं, बल्कि उद्योग और निवेश के लिए भी पहली पसंद बन रहा है। नीति आयोग के 'निर्यात तैयारी सूचकांक 2024' में उत्तराखंड ने छोटे राज्यों की श्रेणी में देश भर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में 'अचीवर्स' श्रेणी में शामिल होना यह बताता है कि राज्य में निवेश के लिए माहौल कितना अनुकूल हुआ है। खुरपिया फार्म में स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप की स्वीकृति और किच्छा में एम्स सैटेलाइट सेंटर का निर्माण स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

वाइब्रेंट विलेज और सांस्कृतिक पुनरुत्थान: 13 जिलों में 13 संस्कृत ग्राम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए धामी सरकार ने 'वाइब्रेंट विलेज' प्रोग्राम के तहत सीमांत गांवों का कायाकल्प शुरू किया है। करीब 270 करोड़ की लागत से 200 से अधिक विकास कार्य बॉर्डर के गांवों में चल रहे हैं। अपनी सांस्कृतिक पहचान को संजोने के लिए सरकार ने 13 जिलों में 13 'आदर्श संस्कृत ग्रामों' की स्थापना की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करने वाला अग्रणी राज्य बनने के साथ ही, स्कूलों में श्रीमद् भगवद् गीता को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का काम किया गया है।

रिकॉर्ड तोड़ पर्यटन और सौर ऊर्जा में आत्मनिर्भरता

पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। साल 2025 में जहां 48 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने चारधाम यात्रा की, वहीं कांवड़ यात्रा में 4.15 करोड़ से अधिक शिवभक्तों की आमद ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी। ऊर्जा क्षेत्र में भी राज्य 'ग्रीन एनर्जी' की ओर तेजी से बढ़ रहा है। राज्य की सौर ऊर्जा क्षमता 1 गीगावाट के पार पहुंच गई है और 42 हजार से अधिक घरों में सोलर रूफटॉप लगाए जा चुके हैं। खेलों के क्षेत्र में पहली बार राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन और 103 पदकों के साथ नया कीर्तिमान बनाना धामी सरकार की खेल नीति की सफलता की कहानी कहता है।