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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बीच मंगलवार को चंडीगढ़ में अहम बैठक हुई। एक होटल में हुई इस बैठक में दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। हालांकि, इस बातचीत में फिलहाल पानी के बंटवारे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका, लेकिन दोनों पक्ष समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत दिखे।

सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई बातचीत

बैठक के बाद दोनों मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चर्चा की जानकारी दी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बातचीत बेहद सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। उन्होंने कहा कि पंजाब गुरुओं की धरती है और गुरु नानक देव की शिक्षाएं आज भी मार्गदर्शन करती हैं। जब संवाद सकारात्मक होता है, तो समाधान भी निकलता है।

अगला कदम: अधिकारियों की संयुक्त बैठक

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने बताया कि अगले चरण में दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग के अधिकारी आपस में बैठक करेंगे और व्यवहारिक समाधान की दिशा में रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद दोनों मुख्यमंत्री दोबारा बैठकर अंतिम निर्णय लेने का प्रयास करेंगे।

भगवंत मान का साफ संदेश: पहले पानी, फिर नहर

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी बैठक को सकारात्मक बताया, लेकिन स्पष्ट किया कि फिलहाल पानी के मसले पर सहमति नहीं बन सकी है। उन्होंने कहा कि जब तक पानी का बंटवारा तय नहीं होता, तब तक नहर निर्माण का कोई औचित्य नहीं है। मान ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि आखिर नहर में पानी जाएगा, कोई जूस तो नहीं।

पुराना विवाद, नई पीढ़ी से उम्मीद

सीएम मान ने कहा कि यह विवाद बहुत पुराना है और वर्षों से लटका हुआ है। अब नई पीढ़ी इसे सुलझाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हरियाणा हमारा दुश्मन नहीं, बल्कि भाई है और पानी आज पूरी दुनिया में गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। जल संरक्षण के उपायों पर भी दोनों राज्यों को साथ मिलकर काम करना होगा।

अधिकारियों को समन्वय बढ़ाने के निर्देश

दोनों मुख्यमंत्रियों ने कहा कि जरूरत के अनुसार अधिकारी आपस में बैठेंगे और उसी तरह समाधान खोजेंगे, जैसे पहले बुजुर्ग आपसी सहमति से मसले सुलझाया करते थे। उद्देश्य यही है कि किसी भी राज्य के अधिकारों का हनन न हो।

क्या है SYL नहर विवाद

SYL नहर को रावी और ब्यास नदियों के पानी के बंटवारे के लिए प्रस्तावित किया गया था। इस परियोजना के तहत 214 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जानी थी, जिसमें से 122 किलोमीटर पंजाब और 92 किलोमीटर हरियाणा में प्रस्तावित है। यह विवाद दशकों पुराना है।
पिछले साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को केंद्र सरकार के साथ मिलकर सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने का निर्देश दिया था। हालिया सुनवाई में शीर्ष अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में तय की है।