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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पंजाब की सियासत में एक बार फिर उबाल आ गया है। 'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख और सांसद अमृतपाल सिंह पर से नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) हटाए जाने के फैसले ने विपक्षी दलों को सरकार के खिलाफ हमलावर होने का मौका दे दिया है। गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इस कदम को राज्य की सुरक्षा के साथ बड़ा खिलवाड़ बताया है और मुख्यमंत्री भगवंत मान से सीधे जवाब की मांग की है।

संवेदनशील समय में ढील क्यों? रंधावा के तीखे सवाल

चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में प्रेस वार्ता के दौरान रंधावा ने कहा कि एक तरफ पंजाब में रेलवे ट्रैक उड़ाने की साजिशें रची जा रही हैं, भारी मात्रा में विस्फोटक मिल रहे हैं, और दूसरी तरफ अमृतपाल सिंह जैसे व्यक्ति से एनएसए हटाया जा रहा है। रंधावा ने पूछा, "सरकार स्पष्ट करे कि ऐसी क्या मजबूरी थी कि इतने संवेदनशील मामले में ढील दी गई? क्या यह खुफिया एजेंसियों की नाकामी है या कोई अंदरूनी राजनीतिक सांठगांठ?" उन्होंने चेतावनी दी कि यह फैसला पंजाब की शांति के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

ऑपरेशन लोटस और विशेष सत्र पर घेरा

रंधावा ने 1 मई को बुलाए गए पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र को भी महज एक 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में भी 'ऑपरेशन लोटस' के नाम पर सत्र बुलाया गया था और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा समेत कई विधायकों ने डीजीपी को शिकायत दी थी। रंधावा ने सवाल उठाया, "उस शिकायत का क्या हुआ? क्या शीतल अंगुराल जैसे नेताओं से पूछताछ हुई जो अब भाजपा में हैं? दो साल बाद भी चार्जशीट दाखिल न होना सरकार की नीयत पर शक पैदा करता है।"

'भरोसे का प्रस्ताव' केवल कुर्सी बचाने का जरिया

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार विशेष सत्र में 'भरोसे का प्रस्ताव' केवल इसलिए ला रही है ताकि अगले 6 महीनों तक बहुमत साबित करने की संवैधानिक बाध्यता से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि जिस सरकार के 7 राज्यसभा सदस्य पार्टी छोड़कर भाजपा में जा चुके हों, उसे नैतिकता के आधार पर सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है। रंधावा ने दावा किया कि 'आप' सरकार अब केवल कुछ महीनों की मेहमान है और पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगना तय है।

खुफिया एजेंसियों की विफलता पर चिंता

रंधावा ने हाल ही में पटियाला में हुए रेलवे ट्रैक ब्लास्ट का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य और केंद्र दोनों की खुफिया एजेंसियां पूरी तरह विफल रही हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्य में आतंकियों का इस कदर सक्रिय होना और सरकार का ढुलमुल रवैया अपनाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें भी भाजपा से ऑफर मिला है, तो उन्होंने हंसते हुए कहा, “अभी तक तो नहीं।”