img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ट्रेन में सफर करने का मन बना लिया है लेकिन टिकट वेटिंग में है? अक्सर यात्री मान लेते हैं कि एक बार चार्ट तैयार (Chart Preparation) हो गया, तो सीट मिलने की सारी उम्मीदें खत्म हो गईं। लेकिन सच तो यह है कि भारतीय रेलवे के नियमों के मुताबिक, चार्ट बनने के बाद भी आपके पास कन्फर्म बर्थ पाने का एक शानदार मौका होता है। आइए जानते हैं कि रेलवे के उस 'करंट बुकिंग' (Current Booking) सिस्टम के बारे में, जो आपकी यात्रा को आरामदायक बना सकता है।

चार्ट बनने के बाद कहां से आती हैं खाली सीटें?

आमतौर पर ट्रेन छूटने से 4 घंटे पहले पहला रिजर्वेशन चार्ट तैयार होता है। बहुत से लोग यह नहीं जानते कि चार्ट बनने के बाद भी कई सीटें खाली रह जाती हैं। इसके पीछे मुख्य वजह अंतिम समय में यात्रियों द्वारा टिकट कैंसिल कराना या किसी कोटा (Quota) की सीटों का खाली रह जाना है। रेलवे इन खाली सीटों को बेकार नहीं जाने देता, बल्कि इन्हें 'करंट बुकिंग' के लिए खोल दिया जाता है। यात्री इन सीटों को ऑनलाइन या स्टेशन के काउंटर से काफी कम समय में बुक कर सकते हैं।

RAC यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं यह नियम

अगर आपकी टिकट RAC (Reservation Against Cancellation) है, तो चार्ट बनने के बाद का समय आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है। यदि कोई यात्री अपनी यात्रा रद्द करता है या ट्रेन में नहीं चढ़ता (No Show), तो वह पूरी बर्थ सबसे पहले RAC वाले यात्री को आवंटित की जाती है। रेलवे के नियमों के अनुसार, टीटीई (TTE) को कुछ स्टेशनों तक यात्री का इंतजार करना होता है और उसके बाद वह सीट आधिकारिक तौर पर अगले हकदार यात्री को दे दी जाती है।

TTE से विनम्र बातचीत दिला सकती है लोअर बर्थ

ट्रेन चलने के बाद भी कई बार 3AC या 2AC जैसे कोच में सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में यदि आपके पास वैध टिकट है, तो आप टीटीई से संपर्क कर सकते हैं। कई बार बीच के स्टेशनों पर यात्री उतर जाते हैं, जिससे आगे की यात्रा के लिए बर्थ खाली हो जाती है। यदि आप जरूरतमंद हैं या बुजुर्गों के साथ सफर कर रहे हैं, तो टीटीई उपलब्धता के आधार पर आपको वह सीट अलॉट कर सकता है। हालांकि, इसके लिए नियम और शर्तों के तहत अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है।

ऑटो अपग्रेडेशन का जादू और ऑनलाइन मॉनिटरिंग

आजकल रेलवे का सिस्टम पूरी तरह डिजिटल है। यात्रा वाले दिन भी आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट या ऐप पर 'चार्ट वैकेंसी' (Chart Vacancy) का विकल्प चेक करते रहना चाहिए। यह फीचर आपको रियल-टाइम में बताता है कि ट्रेन के किस कोच में कौन सी बर्थ खाली है। इसके अलावा, रेलवे का ऑटो-अपग्रेडेशन सिस्टम भी भीड़भाड़ वाले कोच के यात्रियों को ऊपरी श्रेणी (जैसे स्लीपर से 3AC) में खाली सीटों पर शिफ्ट कर देता है।