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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी महायुद्ध अब अपनी सबसे डरावनी शक्ल अख्तियार कर चुका है। सोमवार की आधी रात को ईरान ने इजराइल के खिलाफ अब तक का सबसे घातक हमला करते हुए यरुशलम, वेस्ट बैंक और तेल अवीव समेत कई रिहायशी इलाकों पर क्लस्टर मिसाइलों (Cluster Missiles) की बौछार कर दी। इन मिसाइलों के इस्तेमाल से इजराइल के आसमान में सायरन की गूंज और धमाकों के बीच लाखों लोग बंकरों में दुबकने को मजबूर हो गए। क्लस्टर बमों की खासियत यह है कि ये हवा में ही फटकर सैकड़ों छोटे बमों में बदल जाते हैं, जिससे एक बहुत बड़े दायरे में भारी तबाही मचती है।

तेहरान की दोटूक चेतावनी: 'बिजली काटी तो जल संयंत्रों को उड़ा देंगे'

ईरान ने यह हमला महज सैन्य कार्रवाई के तौर पर नहीं, बल्कि एक चेतावनी के रूप में किया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने साफ कहा है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने 48 घंटे के अल्टीमेटम के तहत ईरान के बिजली ग्रिड या पावर प्लांट्स पर हमला करते हैं, तो ईरान पूरे खाड़ी देशों (Gulf Countries) के ऊर्जा और जल संयंत्रों (Water Desalination Plants) को निशाना बनाएगा। इसका मतलब है कि अब युद्ध केवल सेनाओं के बीच नहीं, बल्कि आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को खत्म करने की ओर बढ़ रहा है।

इजराइल में कोहराम: दिमोना और अराद में भारी नुकसान

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार सुबह से ही पूरे इजराइल में रेड अलर्ट जारी है। इससे पहले इजराइल के अराद और दिमोना (जहां इजराइल का परमाणु केंद्र स्थित है) जैसे संवेदनशील शहरों पर हुए मिसाइल हमलों में सैकड़ों लोगों के घायल होने की खबर है। इजरायली सेना ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन क्लस्टर मिसाइलों के इस्तेमाल ने इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम 'आयरन डोम' और 'एरो' की चुनौतियों को कई गुना बढ़ा दिया है।

वैश्विक बाजारों में 'ब्लैक मंडे': $120 के पार जा सकता है कच्चा तेल

युद्ध की इस आग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सोमवार सुबह जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार खुले, तेल की कीमतों में भारी उछाल और एशियाई शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद रखा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहे, तो कच्चा तेल (Brent Crude) $120 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर सकता है।

"यह युद्ध अब उस मोड़ पर है जहां नागरिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) पर हमले शुरू हो गए हैं। अगर पानी और बिजली के संयंत्रों को निशाना बनाया गया, तो यह मानवता के लिए सबसे बड़ा संकट होगा।" — भू-राजनीतिक विशेषज्ञ

भारत पर असर: सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा को खतरा

खाड़ी देशों में छिड़े इस संघर्ष का सीधा असर भारत पर पड़ना तय है। ऊर्जा और उर्वरक की आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच भारत सरकार पहले से ही 'स्टॉकपाइल' और वैकल्पिक रूटों की तलाश में जुट गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी संसद में इस पर अपनी चिंता व्यक्त की है।