रेवेन्यू में 18% की शानदार बढ़ोतरी के बावजूद धड़ाम हुआ राधाकिशन दमानी का शेयर

रेवेन्यू में 18% की शानदार बढ़ोतरी के बावजूद धड़ाम हुआ राधाकिशन दमानी का शेयर

रेवेन्यू में 18% की शानदार बढ़ोतरी के बावजूद धड़ाम हुआ राधाकिशन दमानी का शेयर, डीमार्ट के निवेशकों को प्रति स्टॉक सीधे ₹240 की तगड़ी चपत

भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के चहेते और दिग्गज निवेशक राधाकिशन दमानी (Radhakishan Damani) द्वारा समर्थित सुपरमार्केट चेन 'एवेन्यू सुपरमार्ट्स' (Avenue Supermarts), जो आम जनजीवन में 'डीमार्ट' (DMart) के नाम से घर-घर में लोकप्रिय है, के शेयरों में आई भारी गिरावट ने बाजार के जानकारों को भी हैरान कर दिया है। कंपनी की तरफ से हाल ही में जारी किए गए तिमाही बिजनेस अपडेट में यह जानकारी सामने आई थी कि कंपनी के रेवेन्यू में लगभग 18 प्रतिशत की दमदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है और कुल रेवेन्यू बढ़कर 19,206 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। इसके बावजूद शेयर बाजार के निवेशकों ने इस आंकड़े पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय बिकवाली का रुख अपनाया, जिसके चलते डीमार्ट के शेयर में एक ही सत्र के भीतर करीब 5 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखने को मिली। इस अचानक आई जोरदार गिरावट के कारण निवेशकों को प्रति शेयर औसतन ₹240 से अधिक की सीधी चपत लगी है, जिससे निवेशकों की कुल संपत्ति में हजारों करोड़ रुपये का गोता लग गया है। इस अप्रत्याशित मंदी के पीछे आखिर क्या असली वजहें हैं और शेयर बाजार क्यों इस मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

मजबूत रेवेन्यू के बाद भी क्यों फिसला डीमार्ट का शेयर?

किसी भी बड़ी खुदरा विक्रेता (Retail Chain) कंपनी के लिए तिमाही आधार पर 18 प्रतिशत की दर से रेवेन्यू बढ़ना आम तौर पर एक बहुत ही शानदार संकेत माना जाता है। डीमार्ट के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही के मुकाबले बढ़कर ₹19,206.18 करोड़ हो गया है और देश भर में कुल स्टोर्स की संख्या बढ़कर 518 तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद शेयर में बिकवाली हावी होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि बाजार के विश्लेषक केवल टॉप-लाइन ग्रोथ (कुल बिक्री) को नहीं बल्कि बॉटम-लाइन यानी शुद्ध लाभ (Net Profit) और ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margins) पर कड़ी नजर रखते हैं। इस तिमाही अपडेट में कंपनी ने मार्जिन और मुनाफे के आंकड़े साझा नहीं किए, जिससे निवेशकों के मन में यह आशंका घर कर गई कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कम होती समान-स्टोर बिक्री (Like-for-Like Sales Growth) के कारण कंपनी के मुनाफे पर दबाव बना हुआ है।

वैल्यूएशन का भारी दबाव और ऊंचे मूल्यांकन की ऊंचाइयां

शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि एवेन्यू सुपरमार्ट्स का शेयर लंबे समय से काफी ऊंचे वैल्युएशन (High P/E Ratio) पर ट्रेड करता रहा है। डीमार्ट का प्राइस-टू-अर्निंग्स रेश्यो ऐतिहासिक रूप से काफी ऊपर यानी लगभग 75 से 80 गुना के आसपास रहता है, जिसका मतलब यह होता है कि बाजार इस कंपनी से लगातार अत्यधिक उच्च प्रदर्शन की उम्मीद करता है। जब किसी शेयर का वैल्यूएशन इतना प्रीमियम होता है, तो मामूली सी भी सुस्ती या अनुमान से कम आंकड़े निवेशकों को निराश करने के लिए काफी होते हैं। 18% की रेवेन्यू ग्रोथ अच्छी जरूर है, लेकिन ऊंचे वैल्युएशन के लिहाज से यह निवेशकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाई, जिसके कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली करना बेहतर समझा और शेयर के दाम धड़ाम से नीचे गिर गए।

क्विक कॉमर्स और बढ़ते कंपटीशन की चुनौती

आज के दौर में भारतीय रिटेल मार्केट का परिदृश्य बहुत तेजी से बदल रहा है। डीमार्ट जैसे ट्रेडिशनल हाइपरमार्केट और सुपरमार्केट मॉडल के सामने अब ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट, जेप्टो और बिगबास्केट जैसे 'क्विक कॉमर्स' (Quick Commerce) प्लेटफॉर्म्स से कड़ी चुनौती मिल रही है। शहरी इलाकों में ग्राहक अब ग्रॉसरी और रोजमर्रा का सामान मिनटों में घर बैठे डिलीवरी पाने की आदत डाल रहे हैं, जिसका असर बड़े स्टोरों की फुटफॉल (Footfalls) और ओल्ड मेट्रो स्टोर्स की ग्रोथ पर पड़ रहा है। हालांकि डीमार्ट अपने किफायती दाम और वैल्यू फॉर मनी के मॉडल के कारण टियर-2 और टियर-3 शहरों में लगातार मजबूत पकड़ बनाए हुए है, फिर भी महानगरों में मिल रही इस आधुनिक डिजिटल टक्कर ने निवेशकों की चिंता को थोड़ा बढ़ा दिया है।

निवेशकों के लिए आगे की क्या है राह और बाजार का मूड?

राधाकिशन दमानी जैसे मंझे हुए निवेशक की रणनीति हमेशा से लंबी अवधि के निवेश और मजबूत बुनियादी बिजनेस मॉडल पर आधारित रही है। कंपनी लगातार अपने स्टोर नेटवर्क का विस्तार कर रही है और देश के कोने-कोने तक अपनी पहुंच बना रही है। बाजार विशेषज्ञों का यह सुझाव है कि短期 उतार-चढ़ाव और तिमाही आंकड़ों पर घबराने के बजाय निवेशकों को कंपनी के दीर्घकालिक फंडामेंटल्स और संपूर्ण वित्तीय परिणामों का इंतजार करना चाहिए। जैसे-जैसे त्योहारी सीजन नजदीक आ रहा है और कंज्यूमर डिमांड में तेजी की उम्मीद जताई जा रही है, खुदरा क्षेत्र की इन कंपनियों के प्रदर्शन में फिर से सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, मौजूदा गिरावट यह जरूर सिखाती है कि शेयर बाजार में कितने भी मजबूत ब्रांड का शेयर क्यों न हो, यदि उसका मूल्यांकन बहुत ज्यादा है तो छोटी सी आशंका भी कीमतों में बड़ी गिरावट का कारण बन सकती है।