एक ही समस्या लेकर पीड़ित दोबारा आया तो होगी सीधी कार्रवाई

एक ही समस्या लेकर पीड़ित दोबारा आया तो होगी सीधी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर राज्य के कोने-कोने तक सुशासन, पारदर्शिता और जनता की शिकायतों के त्वरित समाधान को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) अपने कड़े और बेबाक प्रशासनिक तेवरों के लिए हमेशा जाने जाते हैं। आम जनता की समस्याओं को सीधे सुनने और उनके न्यायसंगत समाधान के लिए मुख्यमंत्री आवास पर नियमित रूप से आयोजित किए जाने वाले 'जनता दर्शन' कार्यक्रम के दौरान इस बार सीएम योगी ने प्रशासनिक अधिकारियों को एक बहुत ही सख्त और दो टूक चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में अल्टीमेटम देते हुए यह कहा है कि यदि कोई भी पीड़ित नागरिक अपनी एक ही समस्या को लेकर बार-बार चक्कर काटने के लिए मजबूर होता है और वह शिकायत दोबारा उनके सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधे तौर पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जनता के प्रति जवाबदेही को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से दिए गए इस बड़े बयान ने प्रदेश के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है और यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में लापरवाही या हीला-हिलावली अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सीएम योगी के जनता दर्शन में उमड़ती है उम्मीद की भीड़, दूर-दराज से पहुंचते हैं फरियादी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू किया गया जनता दर्शन कार्यक्रम राज्य के आम नागरिकों के लिए एक बड़ी उम्मीद का केंद्र बन चुका है। हर दिन सुबह मुख्यमंत्री आवास पर लगने वाले इस दरबार में प्रदेश के अलग-अलग जिलों—चाहे वह लखनऊ हो, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या या फिर दूरदराज के अन्य ग्रामीण इलाके हों—वहां से सैकड़ों की संख्या में पीड़ित लोग अपनी फरियाद लेकर पहुंचते हैं। कोई अपनी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत लेकर आता है, कोई गंभीर बीमारी के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगाता है, तो कोई पुलिस प्रशासन द्वारा कार्रवाई न किए जाने की पीड़ा लेकर पहुंचता है। सीएम योगी खुद एक-एक फरियादी के पास चलकर जाते हैं, उनके प्रार्थना पत्र को बड़े ध्यान से पढ़ते हैं और मौके पर मौजूद प्रशासनिक तथा पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश देते हैं कि हर हाल में पीड़ित की समस्या का पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।

अधिकारियों की कार्यशैली पर मुख्यमंत्री की पैनी नजर, लापरवाही पर कसेगा शिकंजा

समीक्षा बैठकों और औचक निरीक्षणों के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि लोकतंत्र में अधिकारी जनता के सेवक हैं, और उनकी पहली प्राथमिकता आम आदमी की समस्याओं का समाधान करना होनी चाहिए। जनता दर्शन के दौरान कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं जब लोग यह शिकायत करते हैं कि वे स्थानीय थानों, तहसीलों या जिला मुख्यालयों के कई चक्कर काट चुके हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें मजबूरन लखनऊ मुख्यमंत्री के पास आना पड़ा। इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए सीएम योगी ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि जनता को अपनी छोटी-छोटी शिकायतों के लिए भटकना नहीं पड़ना चाहिए। यदि किसी स्तर पर अधिकारी ने संवेदनहीनता दिखाई या कागजी खानापूर्ति करने की कोशिश की, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी तय की जाएगी और उसे बख्शा नहीं जाएगा।

भ्रष्टाचार और मनमानी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का कड़ाई से पालन

उत्तर प्रदेश सरकार की शुरुआत से ही अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति रही है, और प्रशासनिक स्तर पर भी इस नीति को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री का यह ताजा अल्टीमेटम इसी कड़ी का एक हिस्सा है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ और न्याय समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी रिश्वत या दलाली के पहुंचे। जब अधिकारी यह जानते हैं कि मुख्यमंत्री खुद मामलों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और दोबारा शिकायत आने पर गाज गिर सकती है, तो वे अपने स्तर पर ही मामलों का निस्तारण करने में तेजी दिखाते हैं। इस व्यवस्था से न केवल प्रशासनिक कामकाज में कसावट आई है, बल्कि आम जनता का सरकारी तंत्र और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास भी और अधिक मजबूत हुआ है।

जनता के विश्वास पर खरा उतरने की प्रशासनिक प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कड़ा संदेश स्पष्ट रूप से यह बताता है कि उत्तर प्रदेश में अब जनता की आवाज को दबाया या टाला नहीं जा सकता। शासन और प्रशासन का यह दायित्व है कि वह संवेदनशीलता के साथ लोगों की सुने और उनका समाधान करे। जनता दर्शन के माध्यम से मिलने वाले इस जमीनी फीडबैक के आधार पर जब बड़े स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं, तो पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को एक नई गति मिलती है। आने वाले समय में अधिकारियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे पूरी ईमानदारी और तत्परता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें, ताकि किसी भी नागरिक को अपनी फरियाद लेकर बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।